धर्म

Agra : श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के आठवें दिन गिर्राज पूजन एवं छप्पन भोग महोत्सव सम्पन्न

नख पै धरि के श्री गिरिराज, नाम गिरिधारी पायौ है... गोवर्धनधारी लाल की जय–जयकार से गूंजा श्री कृष्ण लीला महोत्सव

मनोहर समाचार, आगरा। श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के आठवें दिवस शनिवार को लीला स्थल बल्केश्वर स्थित गौशाला पर श्रद्धा और भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। भव्य गिर्राज पूजन, अन्नकूट महोत्सव और छप्पन भोग झांकी के दिव्य आयोजन के साथ कार्यक्रम उत्साह एवं अध्यात्मिक उल्लास के बीच सम्पन्न हुआ। बृज वायु में हर तरफ “गिरिराज धरण की जय”, “जय गोवर्धनधारी” और “श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी” के जयघोष गूंजते रहे। लीला मंचन में बालरूप श्रीकृष्ण एवं बलराम के साथ नंदबाबा की यमुना स्नान प्रसंग, वस्त्र-चोरी की हंसमुख लीला और फिर इन्द्र पूजा से बृजवासियों को विरत कर गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का संदेश देने का दृश्य मनोहारी रूप से प्रस्तुत किया गया। श्रीकृष्ण द्वारा प्रकृति पूजन और गौ–सेवा के वैदिक संदेश ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मुख्य अतिथि उप्र लघु उद्योग निगम अध्यक्ष राकेश गर्ग, नेशनल चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल रहे।

सबसे पहले आरती डॉली बंसल ने ठाकुर जी के स्वरूपों की। भगवान को भोग सुरेश चंद्र गर्ग ने खिलाया। आरती के समय नेहा गुप्ता, जगदीश बागला, हनुमंत धाम मंदिर, लंगड़े की चौकी के महंत गोपी गुरु, डॉ हरेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश बंसल, नरेश कुमार, विजय हुंडी, मनीष बंसल, नेशनल चैंबर के उपाध्यक्ष विवेक जैन, टीएन अग्रवाल, नितेश अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, सचिन सारस्वत, डॉ संजीव नेहरू, अमित पारिख, राजेश अग्रवाल, राजीव गुप्ता, दुष्यंत गर्ग, अतुल गुप्ता, संदेश जैन, सुशील जैन, शकुन बंसल, नीरज अग्रवाल उपस्थित रहे।

नख पै धरि के श्री गिरिराज, नाम गिरिधारी पायौ है,
सुरपति पूजन बंद करायौ, श्री गोवरधन कूं पुजवायौ है…
यह मार्मिक पद वातावरण में भक्ति–रस घोल गया।

महोत्सव में गोवर्धन महाराज का भव्य श्रृंगार किया गया। विविध मिष्ठान, फल, पंचामृत, हलवा–पूड़ी, खीर से सुसज्जित छप्पन भोग की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। सीताराम मंदिर वजीरपुरा के महंत अनंत उपाध्याय, मुकेश शर्मा के मार्गदर्शन में भक्तों ने गिरिराज जी का पूजन किया।
पूजनोपरांत अन्नकूट प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने श्रद्धाभाव से प्रसाद ग्रहण किया। भजन मंडली द्वारा प्रस्तुत “गोवर्धन पूजा रखिये मेरी लाज” तथा अन्य भजनों ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया। शंख–घंटा ध्वनि और दीपों की पंक्तियों ने परिसर को दिव्य बना दिया।

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