Agra : चैम्बर प्रतिनिधिमंडल ने आगरा आगमन पर कामिनी चौहान, प्रमुख सचिव राज्य वस्तु एवं सेवा कर लखनऊ से की मुलाकात
एसजीएसटी की समस्याओं से कराया अवगत

-चैम्बर द्वारा दिये गये प्रतिवेदन पर शीघ्र समस्याओं के निस्तारण का दिया आश्वासन
मनोहर समाचार, आगरा । नेशनल चैम्बर का एक प्रतिनिधिमंडल कामिनी चौहान, प्रमुख सचिव राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग से उनके आगरा आगमन पर एसजीएसटी जयपुर हाउस स्थित कार्यालय में मिला। चैम्बर प्रतिनिधिमंडल से उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल द्वारा वर्तमान मंे एसजीएसटी में आ रही व्यवहारिक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।
1. छोटी-2 तकनीकी त्रुटियों के कारण जुर्माना:-ई-वे बिल बनाते समय, इनवाईज बनाते समय व्यापार स्थल पर रिकोर्ड रखते समय व्यापारी द्वारा कुछ मामूली तकनीकी त्रुटियां हो जाती है जैसे- 1. क्रेता का जीएसटीएन देते समय किसी डिजिट का गलत हो जाना। 2. वाहन सं. अंकित करते समय किसी डिजिट का आगे पीछे हो जाना। 3. कम्पाउडिंग डीलर द्वारा बाहर बोर्ड पर यह घोषित नहीं किया जाना कि वह समाधान योजना के अन्तर्गत है। इसी प्रकार अन्य छोटी छोटी त्रुटियां होने पर भी विभागीय अधिकारियों द्वारा जमानत राशि व जुर्माना में पैसा जमा कराया जाता है। हमारा निवेदन है कि कानून नया हैं। सभी व्यापारियों को छोटे-छोटे प्रावधानों का ज्ञान नहीं है तथा कुछ भूलें लिपकीय त्रुटियों के कारण हो जाती है एवं उसमें करापवंचना की कोई मंशा नहीं है। अतः निवेदन है कि ऐसी परिस्थितियों में जुर्माना अथवा जमानत धनराशि जमा नहीं करानी चाहिए।
2. स्टैंडर्ड औपरेडिंग प्रोसीजर – एसआईबी अधिकारियों के लिए एक एसओपी (स्टैंडर्ड औपरेडिंग प्रोसीजर) प्रेसक्राइब किया जाये ताकि स्पॉट पर जाकर उत्पीड़न न हो उसमें निम्नलिखित बातें भी प्रेसक्राइब की जायें।
(ए) प्रोपर रीजन टू विलिव बताया जाये, एवं उसकी कापी दी जाये।
(बी) जिस बिन्दु की जांच नोटिस जारी करके और डिटेल माँगकर की जा सकती है। उसके लिए एसआईबी की जांच द्वारा व्यापारी के स्थान पर जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
(सी) यदि पहले या दूसरे स्तर के डीलर फेक हो तो चैन में सारे व्यापारी फेक होंगे ऐसा मानना उचित नहीं है।
3. अर्थदण्ड – माल रोकने के बाद जो भी पेनल्टी (अर्थदण्ड) लगाया जाता है उसकी अपील उसी प्रदेश तथा शहर में ही निर्धारित अधिकारी के समक्ष की जा सकती है, जो अत्यधिक परेशानी का विषय है, क्योंकि पहले व्यापारी उस शहर में माल छुड़ाने जावे, दुबारा अपील करने जाये तथा तीसरी बार अपील की सुनवाई के लिऐ जावे। इस प्रकार आप स्वयं ही करदाता की परेशानी, खर्चे का अन्दाज लगा सकते हैं। अतः रोके गये कागजात पंजीकृत व्यापारी के पंजीकृत शहर के अधिकारी के यहां भेज दिये जायें तथा अपील भी उसी शहर में करने का प्रोविजन होना चाहिए।
4. एडजर्नमेंट एप्लीकेशन लेने का अवसर प्रदान के संबंध में – किसी नोटिस का रिप्लाई देने के लिए जो समय प्रदान किया जाता है उसके अगले दिन पोर्टल बंद कर दिया जाता है जिसमें कोई टैक्सपेयर किन्हीं कारणों से बन्द होने की तिथि पर रिप्लाई नहीं दे पाया है तो वह अगले दिन रिप्लाई नहीं कर सकता इसके लिए अधिकारियों से मिलना पड़ता है। कोई अधिकारी तो पोर्टल खोल देता है और कोई अधिकारी एलाऊ नहीं करता है। हमारा निवेदन है कि अंतिम तिथि के बाद टैक्सपेयर को नोटिस रिप्लाई देने के लिए एडजर्नमेंट एप्लीकेशन लेने का अवसर प्रदान करना चाहिए।
5. अत्यधिक आईटीसी दावे को लेकर बार-बार निराधार नोटिस – पिछले 15 महीनों में चैम्बर के सम्मानित सदस्य को चार नोटिस प्राप्त हुए हैं, जिनमें अत्यधिक आईटीसी दावा करने का आरोप लगाया गया है। इनमें से तीन नोटिस विभाग द्वारा वापस ले लिए गए हैं और चौथे का उत्तर भी दिया जा चुका है विभाग द्वारा बार-बार ऐसे निराधार नोटिस क्यों जारी किए जाते हैं, जिससे सदस्य फर्म को प्रबंधन का समय और संसाधन व्यर्थ होते हैं।
6. नोटिस की कॉपी व्यक्तिगत भेजे जाने हेतु – विभाग द्वारा नोटिस ईमेल के माध्यम से भेजे जाते हैं हमारा सुझाव है कि नोटिस ईमेल पर भेजने के साथ-साथ व्यक्तिगत कॉपी भी भेजी जानी चाहिये। हमारा मानना है कि विभाग द्वारा व्यक्तिगत नोटिस भेजने से फर्म वर्तमान में कार्यरत है अथवा नहीं की जानकारी प्राप्त होती रहेगी। चूँकि नोटिस ईमेल पर भेजने पर फर्म उस स्थान पर है अथवा नहीं की सही जानकारी विभाग को प्राप्त नहीं हो पाती है। जिससे किसी कारणवष फर्म फर्जी होने पर उससे खरीद-बिक्री कर रहे अन्य उपभोक्ताओं को समस्या का सामना करना पडता है।
प्रमुख सचिव राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग कामिनी चौहान द्वारा चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल को बहुत ही ध्यानपूर्वक सुना गया तथा समस्याओं पर शीघ्र सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया
प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल, कोषाध्यक्ष विनय मित्तल थे।





