धर्म

Agra : राम-भरत मिलन प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, भाई-प्रेम और त्याग का अद्भुत संदेश

श्रीराम कथा के आठवें दिवस चित्रकूट धाम, दशरथ के पुत्र वियोग और भरत मिलाप का मार्मिक वर्णन

मनोहर समाचार, आगरा। गणेश दुर्गा महोत्सव कमेटी के तत्वावधान में लंगड़े की चौकी, शास्त्री नगर स्थित श्री हनुमंत धाम में चल रही 10 दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिवस बुधवार को भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के चित्रकूट धाम पहुंचने, राजा दशरथ के पुत्र वियोग में देह त्याग तथा राम-भरत मिलन जैसे अत्यंत भावपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा व्यास भरत उपाध्याय के मार्मिक वर्णन से कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और वातावरण भक्ति से सराबोर हो गया।

कथा के आठवें दिवस कथा व्यास भरत उपाध्याय ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के वनवास के दौरान चित्रकूट धाम पहुंचने के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि चित्रकूट केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्ति, तप और त्याग की पवित्र भूमि है। यहां भगवान श्रीराम ने वनवास का महत्वपूर्ण समय बिताया, जिससे यह स्थान सदियों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

इसके पश्चात उन्होंने राजा दशरथ के पुत्र वियोग में देह त्याग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि जब भगवान श्रीराम वनवास के लिए अयोध्या से चले गए, तब पुत्र वियोग का दुख सहन न कर पाने के कारण राजा दशरथ ने प्राण त्याग दिए। यह प्रसंग पिता-पुत्र के अटूट प्रेम और भावनात्मक संबंध को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का प्रेम और आशीर्वाद ही संतान के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होता है। कथा के दौरान भरत मिलाप का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि जब भरत को श्रीराम के वनवास का समाचार मिला, तो वे अत्यंत व्यथित हो उठे और तुरंत चित्रकूट पहुंचकर अपने बड़े भाई श्रीराम से मिलने गए। भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजगद्दी संभालने का आग्रह किया, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन और मर्यादा का पालन करते हुए वनवास पूरा करने का संकल्प दोहराया।

कथा व्यास ने कहा कि राम और भरत का प्रेम भारतीय संस्कृति में भाई-भाई के आदर्श संबंध का सर्वोच्च उदाहरण है। भरत ने स्वयं राजसिंहासन स्वीकार नहीं किया और श्रीराम की खड़ाऊं को सिंहासन पर स्थापित कर अयोध्या का संचालन किया। यह प्रसंग त्याग, प्रेम और कर्तव्य भावना की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब परिवारों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, तब राम और भरत का प्रेम हमें यह सिखाता है कि रिश्तों की मजबूती त्याग, विश्वास और समर्पण से ही बनी रहती है।

श्री हनुमंत धाम, लंगड़े की चौकी के महंत गोपी गुरु जी ने कहा कि श्रीराम और भरत का प्रेम भारतीय संस्कृति में आदर्श भाईचारे का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रामकथा हमें यह सिखाती है कि परिवार में प्रेम, सम्मान और त्याग का भाव हो तो हर संकट का समाधान संभव है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे रामायण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर परिवार और समाज में सद्भाव का वातावरण बनाए रखें।

कथा के दौरान जब भरत मिलाप का प्रसंग आया, तो कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरा वातावरण राम नाम के जयकारों और भक्ति भाव से गूंज उठा।

कथा विश्राम पर पार्षद मुरारी लाल गोयल, गप्पू शर्मा, आकाश शर्मा, लालू जादौन, राजदीप ग्रोवर, पुष्कल गुप्ता, विनीता सिंह, रेखा शर्मा, जय मित्तल, राधा भारद्वाज, सोनी सिंह, हरिओम दीक्षित, उमा उपाध्याय आदि ने आरती उतारी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button