Agra : श्रीहरि नाम ही कलियुग का सहारा, अजामिल और प्रह्लाद प्रसंग से मिला भक्ति का संदेश
श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की महिमा सुन श्रद्धालु हुए भावविभोर

मनोहर समाचार, आगरा। भगवान का नाम ही कलियुग में जीव का सबसे बड़ा आश्रय है। “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” का स्मरण जीव को अंतःकरण की शुद्धि, भक्ति और आत्मिक शांति प्रदान करता है। श्रद्धालुओं से प्रतिदिन नाम-जप करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित रहने का संदेश दिया गया कथा व्यास सार्वभौम प्रभु द्वारा। इस्कॉन आगरा एवं राधा सखी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में समाधि पार्क, सूर्य नगर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस श्रद्धालु श्रीहरि भक्ति में भावविभोर हो उठे। कथा का शुभारंभ हरे कृष्ण महामंत्र संकीर्तन से हुआ और समापन भी हरिनाम के मधुर कीर्तन के साथ सम्पन्न हुआ। कथा स्थल पर भक्तों ने संकीर्तन की धुन पर नृत्य कर श्रीकृष्ण नाम का गुणगान किया।

कथा व्यास सार्वभौम प्रभु ने चतुर्थ दिवस राजा प्रियव्रत का वंश, अजामिल उद्धार एवं प्रह्लाद चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत का प्रत्येक प्रसंग जीव को ईश्वर की ओर अग्रसर करता है और बताता है कि भगवान अपने भक्तों को कभी नहीं छोड़ते। भक्ति ही वह मार्ग है, जिससे मनुष्य संसार के बंधनों से मुक्त होकर परम धाम को प्राप्त कर सकता है।
राजा प्रियव्रत के वंश का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि राजसत्ता और वैभव के मध्य भी जीवन का अंतिम लक्ष्य भगवान की भक्ति ही है। संसार की समस्त उपलब्धियां क्षणभंगुर हैं, लेकिन भगवान का नाम और उनकी सेवा शाश्वत है। उन्होंने कहा कि जीवन में पद, प्रतिष्ठा और धन तभी सार्थक हैं, जब वे भगवान के चरणों में समर्पित हों।
अजामिल उद्धार प्रसंग में कथा व्यास ने बताया कि भगवान के नाम की महिमा अनंत है। अजामिल ने जीवन भर अनेक भूलें कीं, किन्तु अंत समय में श्रीहरि का नाम लेने मात्र से उसे उद्धार प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान का नाम ही सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है। हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन आत्मा को पवित्र करता है और जीव को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करता है।
प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर से विमुख नहीं होता। बालक प्रह्लाद ने विपत्तियों, अत्याचार और बाधाओं के बीच भी भगवान नरसिंह पर अटूट विश्वास रखा। यही निष्कपट श्रद्धा और अडिग विश्वास भगवान को भक्त के समक्ष प्रकट होने के लिए बाध्य कर देता है। उन्होंने कहा कि भक्ति में आयु, परिस्थिति और सामर्थ्य नहीं, केवल निष्काम प्रेम और समर्पण आवश्यक है।
राधा सखी ग्रुप की संस्थापिका अशु मित्तल ने बताया कि गुरुवार को बलि महाराज चरित्र, सूर्य वंश, चंद्र वंश एवं श्री कृष्ण जन्म लीला प्रसंग होंगे।
अरविंद स्वरूप प्रभु ने बताया कि कथा केवल श्रवण का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, नाम-स्मरण और भगवान से जुड़ने का अवसर है। कलियुग में हरे कृष्ण महामंत्र ही जीव के कल्याण का सबसे सरल मार्ग है।
कार्यक्रम में अदिति गौरंगी, मोनिका अग्रवाल, रीता खन्ना, लवली कथूरिया, संजीव मित्तल, रेनू भगत, मीनाक्षी मोहन, ज्योति, रेशमा मगन, रेनू लांबा, तनुजा मांगलिक, डॉ अपर्णा पोद्दार, डॉ परिणीता बंसल, शिखा सिंघल आदि उपस्थित रहीं।





