धर्म

Agra : विश्व शांति और जनकल्याण के संकल्प के साथ नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का शुभारंभ

विधिवत पूजन, कलश स्थापना के साथ आरंभ हुआ अनुष्ठान, नौ दिनों में होगा दुर्गा सप्तशती का 100 बार पाठ

मनोहर समाचार, आगरा। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर खंदारी हनुमान चौराहा स्थित नालंदा प्राइड में सूर्यसुता फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का शुभारंभ बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार, विधिवत पूजन एवं कलश स्थापना के साथ हुआ। विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण तथा समस्त मानव समाज के मंगल की कामना को समर्पित इस महायज्ञ में नौ दिनों तक मां आदिशक्ति की विशेष आराधना की जाएगी।

संस्था के सचिव पुष्कल गुप्ता ने बताया कि बाबा बागेश्वर धाम पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आदेशानुसार एवं योगी आलोक नाथ के मार्गदर्शन में यह अनुष्ठान संपन्न कराया जा रहा है। महायज्ञ में विद्वान आचार्य अवनीश पांडे, सत्यम मिश्रा, मिथिलेश, भरत त्रिपाठी, प्रदीप चौबे, पवन त्रिपाठी, रंगम त्रिपाठी सहित आठ ब्राह्मण नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का 100 बार संपुटित पाठ करेंगे।

योगी आलोक नाथ ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में किया जाने वाला संपुटित सप्तचंडी पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के अनेक देशों में युद्ध और अशांति का वातावरण बना हुआ है। ऐसे समय में मां भगवती की आराधना, चंडी पाठ और यज्ञ से विश्व शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा जनकल्याण की भावना को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि देवी महात्म्य में वर्णित सप्तचंडी पाठ केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण का भी अनुष्ठान है।

उन्होंने बताया कि 20 जुलाई (सोमवार) को 101 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण एवं महारुद्राभिषेक किया जाएगा। वहीं 23 जुलाई को दुर्गा सप्तशती का दशांश महाहवन, पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण के साथ महायज्ञ का समापन होगा।

गुप्त नवरात्रि को दस महाविद्याओं की साधना का विशेष काल माना जाता है। इन नौ दिनों में मां काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी (पीतांबरा), मातंगी और कमला की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए जप, पाठ, हवन एवं देवी उपासना से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, आत्मबल, शत्रु बाधा से मुक्ति तथा मनोकामनाओं की सिद्धि प्राप्त होती है।

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