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Agra : बेड़ेई को ओडीओसी में शामिल करने की चैम्बर ने की मांग

ओडीओसी में बेडई को शामिल करने के लिये शासन को शीघ्र भेजा जायेगा प्रस्ताव-उपायुक्त उद्योग

-आगरा को पैकेजिंग हब के रूप में विकसित करने की चैम्बर ने की मांग
-ओडीओसी उत्पादों को वैज्ञानिक एवं आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करना है मुख्य उद्देश्य – प्रो. अंशुमन श्रीवास्तव
-कार्यशाला में पैकेजिंग मानकों, लीगल मेट्रोलॉजी, फूड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड्स, खाद्य पैकेजिंग सामग्री के चयन, स्वच्छता, लेबलिंग, क्यूआर कोड, ट्रेसबिलिटी तथा गुणवत्ता नियंत्रण पर दी गयी विस्तृत जानकारी।

मनोहर समाचार, आगरा। चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र कुमार द्वारा एक जनपद एक व्यंजन (ODOC) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें आईआईपी भारतीय पैकेजिंग संस्थान लखनऊ से पधारे प्रोफेसर अंशुमन श्रीवास्तव द्वारा व्यंजनों की सेल्फ लाइफ में अभिवृद्धि, ईक्रो फेन्डली सुरक्षित एवं स्मार्ट पैकेजिंग, क्यूआरकोड, न्यूट्रीशियन लेबलिंग, बार कोड के साथ पैकेजिंग प्रणाली विकसित करने तथा प्रदेश के व्यंजनों को वृहद बाजार उपलब्ध के कराने के उद्देश्य को थीम बैस्ड व एक्सपोर्ट रैडी पैकेजिंग में उद्यमियो को दक्ष बनाये जाने हेतु महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गयी। कार्यशाला में तकनीकी विशेषज्ञ श्रद्धांनद राय, अस्सिटेंट कमिश्नर-1 जिला उद्योग केन्द्र हुकम चंद दिनकर, राजेश कुमार उपस्थित रहे।

भारतीय पैकेजिंग संस्थान लखनऊ से पधारे प्रोफेसर अंशुमन श्रीवास्तव द्वारा बताया गया कि भारतीय पैकेजिंग की स्थापना सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत वाणिज्य विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अग्रणी पैकेजिंग और संबद्ध उद्योगों के साथ 14 मई 1966 को इसके प्रधान कार्यालय मुंबई में प्रमुख प्रयोगशालाओं क साथ एक सोसायटी के रूप में स्थापना की गयी। भारतीय पैकेजिंग संस्थान उत्तरी भारत मंे पैकेजिंग शिक्षा अनुसंधान और उद्योग सहयोग के लिये एक प्रमुख क्षेत्रीय केन्द्र के रूप में कार्य करता है। एमएसएमई तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग के सहयोग से आईआईपी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिये उत्पाद मूल्यसम्वर्धन और पैकेजिंग प्रौद्योगिकी को उन्नत करके एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिये प्रसिद्ध है। संस्थान पैकेजिंग विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विशेषीकृत कार्यक्रम प्रदान करता है। उद्योग पेशेवरों के लिये प्रशिक्षण और प्रमाणन संचालित करता है, और पैकेजिंग विकास, साम्रगी परीक्षण तथा परामर्श सेवाओं के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करता है। आईआईपी द्वारा प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रम, परीक्षण और प्रमाणन सुविधाएं, परामर्श और अनुसंधान और विकास, प्रर्दशनी/प्रदर्शित प्रोजेक्ट्स, प्रकाशन, सूचना और प्रशिक्षण एवं अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ और मान्यता आदि गतिविधियाँ संचालित की जाती है।

जिला उद्योग केन्द्र से पधारे उपायुक्त उद्योग श्री शैलेन्द्र कुमार जी ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य आगरा के प्रसिद्ध पेठा, दालमोठ, गजक एवं पराठा जैसे ओडीओसी उत्पादों को वैज्ञानिक एवं आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार करना है। बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित कर स्थानीय उद्यमियों एवं कारीगरों की आय में वृद्धि पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में इस प्रकार की पैकेजिंग जागरूकता कार्यशालाओं के माध्यम से स्थानीय पारंपरिक उत्पादों एवं व्यंजनों को सुरक्षित, आकर्षक, मानक अनुरूप एवं निर्यात योग्य बनाकर उन्हें राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यशाला में डॉ. अंशुमन श्रीवास्तव, प्रोफेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, लखनऊ ने प्रतिभागियों को निर्यात के लिए आवश्यक पैकेजिंग मानकों, लीगल मेट्रोलॉजी, फूड सेफ्टी एवं स्टैंडर्ड्स, खाद्य पैकेजिंग सामग्री के चयन, स्वच्छता, लेबलिंग, क्यूआर कोड, ट्रेसबिलिटी तथा गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं गयी। उन्होंने बताया कि सही लेबलिंग एवं क्यूआर कोड के माध्यम से उपभोक्ताओं को उत्पाद की जानकारी, निर्माण तिथि, बैच संख्या, पोषण संबंधी जानकारी तथा निर्माता का विवरण आसानी से उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे उपभोक्ता का विश्वास बढ़ता है और निर्यात में भी सुविधा होती है।

चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल द्वारा बताया गया कि आगरा की बेडई को ओडीओपी में शामिल करने के लिये चैम्बर द्वारा पत्र भेज दिया गया है। इस पर उपायुक्त उद्योग श्री शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि शीघ्र ही आगरा की बेडई को ओडीओपी में सम्मिलित किये जाने का आश्वासन दिया गया। चैम्बर द्वारा उपायुक्त महोदय से मांग की गयी कि आगरा को पैकेजिंग हब के रूप में विकसित किया जाये जिससे गैर प्रदूषणकारी उद्योगों को बढ़ावा मिल सके और आगरा के विकास की राह आसान बन सके।

जिला उद्योग केन्द्र के अस्सिटेंट कमिश्नर-1 श्री हुक्म चंद दिनकर द्वारा बताया गया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक पैकेजिंग मशीनों के बारे में भी अवगत कराया गया। इसमें वैक्यूम पैकेजिंग मशीन, इंडक्शन सीलिंग मशीन, इंकजेट प्रिंटर तथा मैनुअल बैच कोड प्रिंटर के संचालन एवं उपयोग की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के उपयोग से उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ती है, गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है तथा उत्पाद बाजार में अधिक आकर्षक एवं प्रतिस्पर्धी बनते हैं।

चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम में उपस्थित पेठा, दालमोठ, गजक एवं पराठा से जुड़े उद्यमियों, कारीगरों एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से उनके उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांड वैल्यू, विपणन क्षमता एवं निर्यात की संभावनाओं में वृद्धि होगी, जिससे उनकी आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता, सदस्य राजकुमार, भगत, तुषार गुप्ता, अनिल कुमार गुप्ता, रोहित अग्रवाल, रजत सिंघल, राजेश अग्रवाल, गौरव गोयल, कुलदीप कोहली, देवेन्द्र गोयल आदि उपस्थित रहे।

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