धर्म

Agra : धन के लिए नहीं, धर्म के लिए जीवन यापन करना चाहिए : स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज

मनोहर समाचार, आगरा । पंचेश्वर महादेव मंदिर, कालिंदीपुरम कॉलोनी, मऊ रोड, खंदारी बायपास चौराहा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव द्वितीय दिवस पर कथा व्यास अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज, श्रीधाम वृंदावन ने कुंती-भीष्म स्तुति एवं शुकदेव प्राकट्य का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्ममय जीवन जीने का संदेश दिया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे पांडाल में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।

कथा व्यास स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल धन संग्रह के लिए नहीं, बल्कि धर्म के पालन और लोककल्याण के लिए होना चाहिए। धन जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन है, किंतु धर्म जीवन को सार्थक बनाने का माध्यम है। जब व्यक्ति धर्म को केंद्र में रखकर जीवन जीता है, तब उसके जीवन में सुख, शांति और संतोष का वास होता है।

उन्होंने कुंती स्तुति का वर्णन करते हुए कहा कि माता कुंती ने विपत्तियों में भी भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण नहीं छोड़ा। उन्होंने भगवान से सुख नहीं, बल्कि ऐसा भाव मांगा जिससे उनका मन सदैव प्रभु चरणों में लगा रहे। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियां भी ईश्वर के निकट ले जाने का माध्यम बन सकती हैं।

भीष्म स्तुति का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने कहा कि भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर लेटे हुए भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए अपने प्राण त्यागे। उनका जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्य और धर्मनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर परिस्थिति में अपने धर्म और कर्तव्य का पालन करना चाहिए।

कथा के दौरान शुकदेव प्राकट्य प्रसंग का भी अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। महाराजश्री ने बताया कि महर्षि शुकदेव जी जन्म से ही आत्मज्ञानी और वैराग्यवान थे। उन्होंने संसार के मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान की भक्ति और ज्ञान का संदेश दिया। राजा परीक्षित को8 सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा आज भी मानवता के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

मुख्य यजमान मनीष अग्रवाल एवं शिवानी अग्रवाल ने कथा व्यास का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर जगदीश प्रसाद लवानिया, जगमोहन गौतम, आशीष गौतम, नानक चंद मिश्रा, कैलाश गौतम, जेपी शर्मा, शैलेंद्र सिंह दरोगा जी, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, संजीव सिंह, निशांत सिंह कन्नू पार्षद, क्षेत्रपाल सिंह, यश कुमार दुबे, प्रीति मिश्रा, भू देवी राजपूत, कृष्ण सिंह, सारिका सिंह, इशिता सिंह, शानवी सिंह आदि उपस्थित रहे।

कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष लगाए तथा आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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