Agra : रास लीला आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक: सार्व भौम प्रभु
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और रास पंचाध्यायी से भक्तिमय हुआ श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव

मनोहर समाचार, आगरा। इस्कॉन आगरा एवं राधा सखी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में समाधि पार्क में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिवस श्रद्धालु श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कथा का शुभारंभ हरे कृष्ण महामंत्र संकीर्तन से हुआ तथा समापन भी हरिनाम संकीर्तन के साथ सम्पन्न हुआ। संकीर्तन की मधुर धुन पर श्रद्धालु देर तक झूमते रहे और पूरा वातावरण वृंदावनमय हो गया।
कथा व्यास सार्वभौम प्रभु ने श्रीकृष्ण बाल लीलाएं, गोवर्धन लीला, रास पंचाध्यायी एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत की प्रत्येक लीला जीव को भगवान के प्रेम और शरणागति का मार्ग सिखाती है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि निष्कपट प्रेम, वात्सल्य और दिव्य आनंद का संदेश देती हैं।
माखन चोरी एवं ग्वाल बालों के साथ की गई लीलाओं का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं। वृंदावन की गोपियों, यशोदा मैया और ग्वाल बालों का श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम ही वास्तविक भक्ति का स्वरूप है। उन्होंने कहा कि जहां अहंकार समाप्त होता है, वहीं से भक्ति का आरंभ होता है।
गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का नाश कर यह संदेश दिया कि जीव को केवल भगवान का आश्रय लेना चाहिए। गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौ सेवा और भगवान के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
रास पंचाध्यायी प्रसंग में कथा व्यास ने कहा कि रास लीला आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यह सांसारिक भाव नहीं, बल्कि परम प्रेम और पूर्ण समर्पण की आध्यात्मिक अवस्था है। गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम निष्काम भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है, जहां भक्त अपने अस्तित्व को पूर्ण रूप से भगवान में समर्पित कर देता है।
रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपने सच्चे भक्त की पुकार अवश्य सुनते हैं। रुक्मिणी जी की अटूट श्रद्धा और पूर्ण समर्पण ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का सान्निध्य प्रदान किया। यह प्रसंग सिखाता है कि जो भक्त निष्कपट भाव से भगवान को पुकारता है, भगवान स्वयं उसकी रक्षा और कल्याण के लिए उपस्थित हो जाते हैं।
अरविंद स्वरूप प्रभु ने कहा कि मूल श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को शुद्ध भक्ति, नाम-जप और वैदिक जीवन पद्धति का संदेश दिया जा रहा है।
राधा सखी ग्रुप की संस्थापिका अशु मित्तल ने बताया कि शनिवार को श्री कृष्ण लीला , यादव वंश संहार, नवयोगेन्द्र संवाद प्रसंग होंगे।
कार्यक्रम में अदिति गौरंगी, मोनिका अग्रवाल, रीता खन्ना, लवली कथूरिया, संजीव मित्तल, रेनू भगत, मीनाक्षी मोहन, ज्योति, रेशमा मगन, रेनू लांबा, तनुजा मांगलिक, डॉ अपर्णा पोद्दार, डॉ परिणीता बंसल, शिखा सिंघल आदि उपस्थित रहीं।





