धर्म

Agra : बल्केश्वर पार्क में वेदमंत्रों के साथ किया भूमि पूजन

आचार्य इंद्रेश उपाध्याय जी की कथा 31 मई से

मनोहर समाचार, आगरा। विख्यात कथा व्यास एवं युवाओं के प्रेरणास्रोत आचार्य इंद्रेश उपाध्याय जी कथा 31 मई से बल्केश्वर पार्क में होगी, जिसके लिए गुरुवार को भूमि पूजन किया गया, मुख्य अतिथि थे राज्य सभा सांसद नवीन जैन। उन्होंने कहा कि संतों की वाणी से जीवन का कल्याण होगा। श्री बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के लिए भूमि पूजन में सर्वप्रथम वेदमंत्रों के साथ देव उपासना की गई। उसके बाद हवन किया गया। इस दौरान जयघोषों से माहौल भक्तिमय हो गया।

बल्केश्वर मंदिर के महंत कपिल नागर जी के सानिध्य में हुए इस भूमि पूजन में राज्य सभा सांसद नवीन जैन ने कहा कि आज के युवा वर्ग पर विसंगतियों का प्रकोप है। वह अपने लक्ष्य से भटक रहा है। ऐसी परिस्थिति में संतों के वचन ही उनके जीवन में बदलाव ला सकते हैं। इसलिए श्रीमद् भागवत कथा का यह आयोजन समाज के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण होगा। पूजन और हवन पं.राकेश चतुर्वेदी ने पूजन कराया। पूजन करने वालों में मुख्य यजमान हरीश अग्रवाल करूणा अग्रवाल पदम अग्रवाल राजेश अग्रवाल मनीष गोयल शिवांग अग्रवाल अजय गोयल नितेश अग्रवाल गिरीश बंसल पार्षद मुरारीलाल गोयल आदर्श नन्दन गुप्त ऋषि अग्रवाल आदि मौजूद रहै।

31 मई को निकाली जाएगी कलश यात्रा
कलश यात्रा 31 मई को प्रातः निकाली जाएगी, जो बल्केश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर बल्केश्वर पार्क पहुंचेगी। इसी दिन भागवत कथा शुरू हो जाएगी, जिसका समय शाम 4 बजे रहेगा। एक जून को सती चरित्र, ध्रुव कथा, कर्दम देवाहुति प्रसंग, 2 जून को नरसिंह व वामन अवतार की कथा, 3 जून को श्रीराम जन्मोत्सव, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 4 जून को बाल लीला, श्री गोवर्धन पूजा, 5 जून को राम पंचाध्याय, रुक्मिणी विवाह, 6 जून को सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण उद्धव संवाद, परीक्षित मोह, शुकदेव पूजन के साथ कथा का विश्राम हो जाएगा।

विलक्षण आध्यात्मिक मार्गदर्शक हैं इंद्रेश जी
आचार्य इंद्रेश उपाध्याय जी विख्यात कथा वाचक श्री कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर जी के सुपुत्र एवं भक्तिपथ संस्था के संस्थापक हैं। इंद्रेश जी प्रसिद्ध कथा वाचक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके प्रवचन और कथाएं मात्र धार्मिक ज्ञान का संचार नहीं करते, बल्कि वे मानवता के प्रति समर्पण की अद्भुत प्रेरणा भी प्रदान करते हैं, जिससे वे अपने अनुयायियों के लिए एक आदर्श बन चुके हैं।

वे श्रीमद् भागवत की महिमा को सरल और प्रभावी रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने मात्र 13 वर्ष की आयु में श्रीमद्भागवत का अध्ययन और इसे कंठस्थ कर लिया था। 29 वर्षीय़ इंद्रेश जी ने अपनी पहली कथा 18 वर्ष की आयु में गुजरात में की थी। उसके बाद निरंतर वे इस भक्ति मार्ग के लिए समर्पित हो गए हैं।

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