Agra : विश्व जल संरक्षण दिवस मनाना काफी नहीं, इसे जीवन में आत्मसात करें-ज्योतिषाचार्य डॉ.पूनम वार्ष्णेय
जल ही जीवन है, जल है तो कल है

22 मार्च को प्रत्येक वर्ष “विश्व जल दिवस “मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पानी की महत्ता के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। जल के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है। हमारे शरीर का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जल है,जो हमारे अंगों और कोशिकाओं के सही कार्य के लिए आवश्यक है। जल का उपयोग न केवल पीने के लिए होता है, बल्कि कृषि, उद्योग और घरेलू कार्यों में भी किया जाता है। जल की कमी से न केवल स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं, बल्कि यह कृषि उत्पादन को भी प्रभावित करता है। अतः जल का संरक्षण करना भी आवश्यक है। जल संकट एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। हमें जल का सही उपयोग करना चाहिए और इसे बर्बाद करने से भी बचना चाहिए।
जल ही जीवन है, यह हमारे अस्तित्व का आधार है। सीमित मीठे पानी के संसाधनों और बढ़ते प्रदूषण के कारण जल संरक्षण करना हमारा परम कर्तव्य है। पृथ्वी पर 71 प्रतिशत पानी होने के बावजूद उपयोग योग्य मीठा पानी बहुत कम है जो की प्रदूषित हो रहा है।

दुनिया के तेजी से बदलते दौर में तकनीकी प्रगति और आधुनिक जीवन शैली ने सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन वास्तव में अनियोजित शहरों का विस्तार, जल स्रोतों का अतिक्रमण, भूजल का अत्यधिक दोहन इस संकट के मुख्य कारण है।

प्राचीन काल में हमारे पूर्वज तालाब ,बावड़ी कुएं आदि बनाकर जल का संरक्षण करते थे। आज सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं जैसे अटल भूजल योजना, जिसका उद्देश्य सात राज्यों में (गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक,मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र ,राजस्थान, उत्तर प्रदेश) के जल संकट वाले क्षेत्रों में भूजल प्रबंधन में सुधार करना है।
“जल जीवन मिशन”भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जो जल ही जीवन के मूल मंत्र पर आधारित है। 15 अगस्त 2019 को शुरू हुए इस मिशन का उद्देश्य 2028 तक हर ग्रामीण घर में नल से शुद्ध और पर्याप्त पेयजल पहुंचना है। यह योजना जल संरक्षण और जल भागीदारी पर जोर देती है।
“मिशन अमृत सरोवर”देश में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक राष्ट्रीय अभियान है, जिसका लक्ष्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर पर्यावरण और लोगों को स्वच्छ जल का लाभ पहुंचाना है।
हमें इस विश्व जल दिवस पर यह संकल्प लेना चाहिए, कि हम आम नागरिक को जल के प्रति जागरूक करेंगे। जल साक्षरता बढ़ानी होगी। वर्षा जल का संरक्षण करना होगा और जल का विवेक पूर्ण उपयोग अपनाना होगा।
डॉ. पूनम वार्ष्णेय
(लेखक विख्यात ज्योतिषाचार्य हैं)





