शिक्षा

Agra : किन्नर गुरु मुकेश बाई ने अनाथ बच्ची को अपनाकर बदली समाज की सोच, विश्व हिंदू महासंघ ने किया सम्मानित

13 साल पहले अस्पताल में छोड़ी गई नवजात को दिया मां का आंचल, आज आठवीं की छात्रा सानिया आईएएस बनने का देख रही सपना

मनोहर समाचार, आगरा। समाज में जहां आज भी बेटियों को जन्म के बाद त्यागने जैसी अमानवीय घटनाएं सामने आती हैं, वहीं एक किन्नर मां ने ममता, साहस और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गई है। किन्नर गुरु मुकेश बाई ने 12 घंटे की एक नवजात बच्ची को गोद लेकर न केवल उसकी जिंदगी बचाई, बल्कि उसे एक सम्मानजनक भविष्य भी दिया। 

करीब 13 वर्ष पूर्व सिकंदरा स्थित एक निजी अस्पताल में एक दंपत्ति अपनी 7 माह में जन्मी नवजात बच्ची को छोड़कर चले गए। बच्ची जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी। उसी दौरान अस्पताल से जुड़े एक व्यक्ति के माध्यम से यह जानकारी मुकेश बाई तक पहुंची। बिना किसी पूर्व अनुभव के, लेकिन ममता से भरे दिल के साथ मुकेश ने बच्ची को गोद लेने का निर्णय लिया।

मुकेश बताती हैं कि जब उन्होंने पहली बार उस मासूम को गोद में उठाया, तो उनके भीतर का मातृत्व जाग उठा और उन्होंने समाज की तमाम रूढ़ियों को तोड़ते हुए उसे अपनी संतान के रूप में अपना लिया। उन्होंने न केवल बच्ची का पालन-पोषण किया, बल्कि उसे एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल भी दिया।

आज वही बच्ची, सानिया गोस्वामी, आगरा पब्लिक स्कूल में कक्षा आठवीं की छात्रा है और पढ़-लिखकर आईएएस अधिकारी बनने का सपना देख रही है। सानिया मुकेश को ‘अम्मा’ कहकर पुकारती है और उन्हें ही अपना पूरा परिवार मानती है।

मुकेश ने सानिया के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसके नाम एक 100 गज का मकान भी कर दिया है, ताकि उनके बाद भी उसे किसी सहारे की कमी न रहे। खास बात यह है कि मुकेश ने सानिया को किन्नर समाज की पारंपरिक गतिविधियों से दूर रखते हुए उसे मुख्यधारा की शिक्षा और संस्कार दिए हैं।

मुकेश बाई की इस मानवीय पहल और समाज में सकारात्मक संदेश देने के लिए उन्हें विश्व हिंदू महासंघ द्वारा सानिया के जन्मदिन के अवसर पर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष किशन गुप्ता, मंडल प्रभारी राजेश कुमार शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनीता मेहता, संध्या जोशी आदि ने उनके आवास पहुंचे और उन्हें स्मृति चिन्ह व पटका पहनाकर सम्मानित किया।

जिला अध्यक्ष किशन गुप्ता ने कहा कि मुकेश बाई ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत और ममता किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होती। उनका यह कार्य पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है।

मंडल प्रभारी राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि आज के दौर में जहां लोग अपने ही बच्चों को छोड़ देते हैं, वहां मुकेश बाई ने एक अनजान बच्ची को अपनाकर समाज के सामने एक नई दिशा प्रस्तुत की है।

मुकेश बाई ने समाज से अपील करते हुए कहा कि नवजात बच्चियों को त्यागना एक घोर अपराध और अमानवीय कृत्य है। यदि कोई परिवार किसी कारणवश बच्चे का पालन-पोषण नहीं कर सकता, तो उसे सुरक्षित हाथों में सौंपे, ताकि उसे जीवन का अधिकार मिल सके। उन्होंने बताया कि आगरा में ऐसे और भी उदाहरण हैं, जहां किन्नर समाज द्वारा बच्चों की परवरिश की जा रही है। उनका कहना है कि “हम भी इंसान हैं, हमारे भीतर भी ममता है, और हम भी किसी बच्चे को बेहतर जीवन दे सकते हैं।”

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