धर्म

Agra : समाज को कमजोर करता है अंधविश्वास : स्वामी आर्यवेश

कर्म आधारित है वैदिक वर्ण व्यवस्था, मानवता ही सबसे बड़ा धर्म

तीन दिवसीय आर्य महा सम्मलेन की जनक पार्क में हुई शुरुआत

मनोहर समाचार, आगरा। अंधविश्वास और पाखंड ने समाज को कमजोर किया है, जबकि आर्य समाज का उद्देश्य तर्क, विज्ञान और सत्य के आधार पर जीवन जीने की प्रेरणा देना है। वेदों में नारी को पूजनीय स्थान दिया गया है और कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा तथा अशिक्षा जैसी कुरीतियाँ वेद विरुद्ध हैं। ये उद्द्घार आर्य केंद्रीय सभा की ओर से कमला नगर स्थित जनक पार्क में शुरू हुए आर्य महासम्मेलन के पहले दिन मुख्य वक्ता स्वामी आर्यवेश ने व्यक्त किये। सम्मेलन की शुरुआत लघु उद्योग निगम लिमिटेड अध्यक्ष राकेश गर्ग और समाजसेवी राजेश मंगल ने ध्वजारोहण कर किया।

डॉ. आचार्य वागीश ने कहा कि वैदिक वर्ण व्यवस्था जन्म नहीं, बल्कि कर्म, गुण और स्वभाव पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य का मूल्य उसकी मानवता, आचरण और कर्तव्य से तय होता है, न कि उसके जन्म से। वेदों में कहीं भी मनुष्य को ऊँच-नीच में बाँटने की शिक्षा नहीं दी गई है। आर्य समाज का संदेश है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों से श्रेष्ठ बन सकता है। एटा गुरुकुल के अधिष्ठाता डॉ. आचार्य वागीश ने कहा कि मनुष्यता को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि करुणा, सत्य, सेवा और समानता को जीवन में धारण किए बिना कोई भी धार्मिक नहीं हो सकता। जब मनुष्य अपने भीतर मनुष्यता का भाव जाग्रत करेगा, तभी समाज और राष्ट्र का वास्तविक उत्थान संभव है।

आचार्य विष्णुमित्र वेदारथी ने कहा कि ब्रह्मचर्य से व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से सशक्त होता है तथा संयमित जीवन से मनुष्य सौ वर्षों से भी अधिक आयु प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि वेदों में ब्रह्मचर्य को जीवन की आधारशिला बताया गया है। इस अवसर पर संयोजक प्रदीप कुलश्रेष्ठ, मंत्री वीरेंद्र कनवर, कोषाध्यक्ष सुधीर अग्रवाल, देव सरन, विवेकानंद, रविंद्र कुलश्रेष्ठ, अश्वनी आर्य, यतेंद्र आर्य, सुशील असीजा, अवनींद्र गुप्ता, राजकुमार आहुजा, अश्वनी डेम्बल, रंगलाल गौतम, डॉ. अनुपम गुप्ता, भारत भूषण सामा, प्रदीप डेम्बल, प्रेमा कनवर, सुमन कुलश्रेष्ठ, नमिता शर्मा, रितिका अरोरा, विकास आर्य, अनुज आर्य, अरविंद मेहता, वंदना आर्य, विजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

वर्चुअल जुड़ेंगे स्वामी रामदेव
प्रधान सीए मनोज खुराना ने बताया कि सुबह और शाम के सत्रों में आर्य महासम्मेलन में हज़ारो कि संख्या में पुरे आगरा मंडल से आर्यजन आये हुए है। सम्मेलन के मंच से वैदिक संस्कार, नशामुक्ति, नारी सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। गुरुकुल सासनी की कन्याओं ने वैदिक यज्ञ किया। भजनोपदेशक पंडित कुलदीप आर्य द्वारा महर्षि दयानंद आर्य समाज और वैदिक धर्म के भजनों द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। माता शांति नागर ने महर्षि दयानन्द के बारे में कविता पाठ कर सुनाया। शनिवार को सुबह के सत्र में हरिद्वार से स्वामी रामदेव वर्चुअल रूप में प्रातः 11 से एक बजे के बीच सम्मलेन में आर्यजनो को सम्बोधित करेंगे। संचालन आर्य अश्वनी ने किया।

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