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Agra : ट्रेड टैक्स वापस नहीं तो जूता व्यापारी एमजी रोड़ पर करेंगे चक्का जाम

द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन कार्यालय में लगे नगर निगम होश में आओ... के नारे, नगर निगम को एक मई तक का अल्टीमेटम, अन्यथा सड़कों पर होगा आंदोलन

मनोहर समाचार, आगरा। व्यापार में मंदी के साथ मिडिल-ईस्ट के युद्ध के कारण महंगाई के मार से त्रस्त जूता व्यवसाय पर नगर निगम ने एक और बोझ लाद दिया है, ट्रेड टैक्स का। ऐसे दौर में जब अनुदान मिलना चाहिए टैक्स का बोझ लादा जा रहा है। घर की रोजी रोटी का इंतजाम हो नहीं पा रहा और टैक्स बढ़ रहे हैं। नगर निगम ने 1 मई तक लगाए गए ट्रेड टैक्स को वापस नहीं लिया तो जूता व्यापारी सड़कों पर उतरेंगे, एमजी रोड पर चक्का जाम किया जाएगा। दलितों की राजधानी में सिसकियां ले रहा जूता व्यवसाय को बचाने के लिए आंदोलन में व्यपारियों से लेकर मजदूर और दस्तकार सभी उतरेंगे। कोई अनहोनी हुई तो उसका जिम्मेदार तुगलती फरमान जारी करने वाला नगर निगम होगा।

यह घोषणा आज द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन, भीम युवा व्यापार मंडल, भीम युवा व्यापार संगठन की संयुक्त बैठक में की गई। हींग की मंडी स्थित द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन कार्यालाय में आयोजित बैठक में फैडरेसन के अध्यक्ष विजय सामा ने सभी की सहमति के साथ मजदूर दिवस (एक मई) तक का अल्टीमेटम नगर निगम को दिया। यदि एक मई तक ट्रेड टैक्स का तुगलकी फरमान वापस नहीं लिया गया तो जूता व्यापार से जुड़े लगभग साढ़े तीन लाख परिवार के हजारों की संख्या में जूता व्यापारियों, कारीगरों द्वारा शहीद स्मारक से लेकर नगर निगम तक चक्का जाम किया जाएगा। एक तरफ सरकार अनुदान और राशन देने की बात करती है, दूसरी तरफ आगरा नगर निगम रोटी छीनने की बात कर रहा है। गरीब, मजदूर और दलितों का संगठन है जूता व्यवसाय। 1 मई तक ट्रेड टैक्स वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन होने पर किसी भी प्रकार की दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नगर निगम होगा।

भीम युवा व्यापार मण्डल के अध्यक्ष प्रदीप पिप्पल ने कहा कि नगर निगम जूता व्यापारियों की पीड़ा समझे। खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे माल के दाम 30-100 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। ऐसे समय में मदद के बजाय व्यापारियों पर नए कर का बोझ को लादा जा रहा है। 25 कारीगरों से कम के कारखानों को रजिस्ट्रेशन की भी जरूरत नहीं होती। नगर निगम नए नियम बना रहा है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से अजय महाजन, मनप्रीत सिंह, अनिल लाल, प्रमोद गुप्ता, प्रदीप मेहरा, घनश्याम दास बोहरा, वासूदेव मूलचंदानी, बाबू भाई, डब्बू भाई, प्रमोद जैन, सुधीर महाजन, अतुल कर्दम, रूपेश,करन सिंह, विजय पिप्पल, सुरेन्द्र पिप्पल, जितेश कुमार आदि उपस्थित थे।

दलितों के उत्थान के बजाय हो रहा उत्पीड़न
द आगरा शू फैक्टर्स फैडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने कहा कि 25 से कम कारीगर वाले कारखानों पर भी शुल्क लगा दिया गया है। 25 से अधिक कारीगरों वाले कारखानों पर अलग शुल्क है। यह गुलामी की वह अनुभूति है, जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के आने पर भारतियों ने महसूस की थी। एक तरफ दलितों के उत्थान की बात और दूसरी तरफ टैक्सों का बोझ। यह आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न की तरह है। टैक्स जनता की भलाई के लिए उपयोग होता है। परन्तु यहां टैक्स के नाम पर दलित समाज की राजधानी में दलितों के साथ उत्पीड़न किया जा रहा है। टीटीजेड के नियमों के कारण कोई नया कारखाना नहीं खोल सकता, जो कारखाने हैं वह मंदी, महंगाई और टैक्स के बोझ के कारण बंद हो रहे हैं।

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