ज्योतिष

Agra : ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र का अध्ययन आवश्यक क्यों है?

ज्योतिष शास्त्र को वेदों का चक्षु कहा गया है। वेदों को देव वाणी कहा गया है। अर्थात् ज्योति+ईश= ज्योतिष, अर्थात् ईश्वर के द्वारा प्रदत्त मार्ग दर्शन अथवा ज्ञान। कुछ लोग कहते हैं, कि हम ज्योतिष में विश्वास नहीं करते हैं। हमें तो ईश्वर पर भरोसा है। लेकिन जब वे बीमार पड़ते हैं अथवा जरा सा कष्ट होता है, तो दौड़कर डॉक्टर के पास भागे जाते हैं। अरे, भाई जब आपको भगवान पर भरोसा है, तो फिर भगवान पर भरोसा करिए, मत जाइए डॉक्टर के पास। लेकिन आप जाते हैं और डॉक्टर साहब के द्वारा किए गए इलाज से आपको आराम हो जाता है। उसी तरह ज्योतिष शास्त्र के द्वारा बताए गए उपाय से जो ग्रह आपको नकारात्मक प्रभाव दे रहा हैं, वह कम हो जाता है। जिस ग्रह के द्वारा मिल रहा कम सकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है।

हमारे जीवन में एक होती है जन्मपत्री एवं एक होती कर्मपत्री और वास्तु। उपरोक्त सभी हमारे स्वास्थ्य, उन्नति, धन सम्पत्ति, सन्तान सुख, वाहन सुख, कैरियर, मान प्रतिष्ठा, पद प्रतिष्ठा में इनका विशेष सहयोग होता है। आप ज्योतिष के द्वारा अपने जीवन से जुड़ी हर समस्या का समाधान पा सकते हैं। आप अपने बच्चों एवं परिजनों की उन्नति एवं प्रगति में सहायता प्रदान कर सकते हैं।

उदाहरण स्वरूप घातक परिणाम
जो लोग कहते हैं हम ज्योतिष एवं मुहूर्त में विश्वास नहीं करते हैं। वे इन कुछ विशेष तथ्यों को परख लें। उन्हें ज्योतिष में विश्वास हो जाएगा।
1. किसी मांगलिक या वृद्धि पुष्टि वाले कार्य को आप अमावस्या तिथि को प्रारम्भ करिए। देखते हैं दुनियां की कौनसी ताकत उस कार्य को सफल करती है।
2 . अग्नि नाड़ी में जल संबंधी कार्य शुरू कीजिए। दावा है कि आप जल प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
3. बृहस्पतिवार ( गुरुवार) को पुष्य नक्षत्र में विवाह करके देखिए, कितनी जल्दी तलाक होता है।
4. मंगलवार को अश्वनी नक्षत्र अथवा रविवार को मकान संबंधी अथवा भूमि खनन संबंधी कार्य शुरू कीजिए, फिर देखो कितनी जन एवं धन हानि होती है। शनिवार को रोहिणी नक्षत्र, मंगलवार में अश्वनी नक्षत्र में गृह प्रवेश कर आप उस घर में चैन से नहीं रह सकते हैं।
5. दिशा शूल व नेष्ट चन्द्रमा में यात्रा या युद्ध आरम्भ करिए वापस घर का मुंह देखना जल्दी नसीब नहीं होता है।
6. अपनी जन्म राशि से 4,6,8,12, वें चंद्रमा में अपना आपरेशन अथवा इलाज कराने जाए, फिर आप देखिए कि क्या होता है।

वर्तमान समय में भागदौड़ भरी जिन्दगी में ज्योतिष एवं वास्तु का ज्ञान होना बेहद जरूरी है।
यहां मैं एक और उदाहरण देता हूं। एक बार तुलसीदास जी लाल लंगोट पहन कर जा रहे थे, तो उन्हें रास्ते में एक बालक मिला, बालक ने कहा कि तुलसीदास जी आप इधर से मत जाइए, क्योंकि आगे सांड खड़ा है। लेकिन उन्होंने उस बच्चे की बात नहीं मानी और सांड ने तुलसीदास को उठा कर पटक दिया। तुलसीदास अभी-अभी एक पेज पर लिख कर आए थे, कि सभी प्राणियों में ईश्वर का वास होता है। तो वे लौटकर उस पेज को फाड़ने लगे, तभी हनुमान जी प्रकट हो गए। तुलसी दास कहने लगे कि सांड ने मुझे मारा, तब हनुमान जी बोले आपको उस बच्चे में भगवान के दर्शन नहीं हुए जिसने आपको मार्ग बदलने के लिए कहा था। इस कहानी का मतलब है। ज्ञान एवं परामर्श देने वाला भी ईश्वर का ही रूप है।
अतः हम सभी को ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र, हस्त रेखा, face Reading, अंक ज्योतिष का ज्ञान होना चाहिए। इससे आप अपना एवं अपने परिजनों का तो भला करेंगे ही साथ ही वृद्धावस्था में सक्रीय रह कर कुछ धन भी कमाते रहेंगे।

ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की नई क्लासिस 6 फरवरी 2026 से शुरू हो रही है।

विख्यात ज्योतिषाचार्य
डॉ अरविन्द मिश्र
ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ।
भविष्य बनाओ ज्योतिष एवं वास्तु संस्थान शॉप 21, ब्लॉक न 25 ग्राउंड फ्लोर (निकट शहीद स्मारक पार्क) संजय प्लेस आगरा।
संपर्क सूत्र: 9412343560

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button