धर्म

Agra : माघ पूर्णिमा पर श्री मनकामेश्वर मंदिर में 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण का दिव्य जीर्णोद्धार

वैदिक मंत्रोच्चार, गुरुजनों के आशीर्वाद और अखंड आस्था के साथ सिद्ध हुआ मनोरथ

-वर्ष 2028 में बदला जाएगा मुख्य शिवलिंग का आवरण, विगत वर्ष अर्पित हुआ था रजत द्वार

मनोहर समाचार, आगरा। आगरा के प्राचीन, सिद्ध एवं श्रद्धा के प्रमुख केंद्र श्री मनकामेश्वर मंदिर, रावत पाड़ा में माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्ति, परंपरा और अध्यात्म से ओतप्रोत एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर में चांदी निर्मित 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण के जीर्णोद्धार का भव्य मनोरथ विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण किया गया। श्री महंत योगेश पुरी द्वारा पूर्व अखंड दीपक से एक एक करके जोत लेकर रजत दीपों को प्रज्वलित किया गया।


मंदिर के श्री महंत योगेश पुरी ने बताया कि “यह पुण्य कार्य 27 पीढ़ियों के श्री महंत गुरुजनों के आशीर्वाद से सिद्ध हुआ है।” उन्होंने कहा कि “आज पूरे भारत में श्री मनकामेश्वर मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां 11 रुद्र अखंड ज्योतियां रजतावरण स्वरूप में सतत प्रज्वलित हैं, जो सनातन आस्था और अखंड साधना का अनुपम उदाहरण हैं। 11 ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतीक स्वरूप हैं जिसमें से एक स्वयं बाबा श्री मनकामेश्वर हैं।”
उन्होंने बताया कि “शास्त्रसम्मत परंपरा के अनुसार संध्याकाल में दीप प्रज्वलन का विधान है। इसी क्रम में सूर्यास्त के समय वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चांदी निर्मित 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण स्वरूप का मनोरथ सिद्ध किया गया। मंदिर परिसर में अखंड ज्योतियां प्राचीन काल से निरंतर प्रज्वलित चली आ रही हैं, जो बाबा मनकामेश्वर की कृपा और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक हैं।”

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने कहा कि “बाबा के दरबार में दीप प्रज्वलन की विशेष मान्यता है। मनोकामना पूर्ण होने पर दीपक जलाने की परंपरा है, वहीं शारीरिक, मानसिक अथवा आर्थिक बाधा आने पर श्रद्धालु बाबा से प्रार्थना कर दीपक जलाने का संकल्प लेते हैं और कार्य सिद्ध होने पर पुनः दीप प्रज्वलित करते हैं।” उन्होंने बताया कि “ये अखंड ज्योतियां सैकड़ों वर्षों से निरंतर प्रज्वलित हैं और मंदिर की आध्यात्मिक परंपरा की साक्षी हैं। कोरोना काल में भी अखंड ज्योत प्रभावित नहीं हुईं थीं।”

अखंड ज्योति प्रज्वलन के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भी दीप प्रज्वलित कर बाबा से सुख, शांति, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की। पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष और भक्तिरस से सराबोर हो उठा।

माघ पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर संपन्न 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का सशक्त प्रतीक बना, बल्कि श्री मनकामेश्वर मंदिर की प्राचीन परंपराओं, अखंड साधना और सनातन संस्कृति की गौरवशाली धरोहर को भी उजागर करता है।

2028 में 200 किलो के चांदी का आवरण धारण करेंगे बाबा मनकामेश्वर
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि “विगत वर्ष सावन मास से पूर्व बाबा मनकामेश्वर को 100 किलोग्राम चांदी से निर्मित भव्य द्वार समर्पित किया गया था, जिस पर भगवान शंकर के सभी प्रमुख प्रतीक चिन्ह अंकित हैं। अब प्रयास है कि 2028 में मुख्य शिवलिंग का चांदी का आवरण बदला जाएगा। 200 किलो चांदी का आवरण मुख्य शिवलिंग पर धारण कराया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button