धर्म

Agra : बैसाखी पर्व पर गुरमत समागम में गूंजा गुरुबाणी का अमृत रस

कीर्तन दरबार के साथ हुआ समापन

मनोहर समाचार, आगरा। बैसाखी एवं खालसा सृजन दिवस के पावन अवसर पर गुरुद्वारा श्री कलगीधर, सदर बाजार में आयोजित गुरमत समागम एवं कीर्तन जोड़ मेले का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। 11 अप्रैल से आरंभ हुए इस भव्य समागम का समापन दिवस विशेष रूप से आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। प्रातः अमृतवेले से ही संगतों ने गुरु महाराज जी की हजूरी में उपस्थित होकर गुरुबाणी का ओट-आसरा लिया और अमृतमयी कीर्तन का रसपान किया। दिनभर चले आलौकिक कीर्तन दरबार में संगत ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और गुरु का शुक्राना अदा किया।

कीर्तन दरबार में पंथ के सुप्रसिद्ध रागी जत्थों ने बारी-बारी से हाजिरी भरते हुए संगत को गुरुबाणी के रस में सराबोर कर दिया। दरबार साहिब श्री अमृतसर के हजूरी रागी भाई साहिब भाई सरबजीत सिंह जी, अखंड कीर्तन जत्था के भाई जसपाल सिंह, कथा वाचक भाई केवल सिंह, भाई साहिब भाई हरजोत सिंह, प्रभजोत सिंह, गुरुद्वारा मिट्ठाखू, भाई हरजीत सिंह हजूरी रागी सहित सभी रागी जत्थों ने लड़ीवार कीर्तन की हाजिरी भरकर संगतों को निहाल किया।

इन रागी जत्थों द्वारा “रखवाला गोबिंद राइ ”, “भगतन की रासि ”, “रहिणी रहै सोई सिख मेरा”, “ठाकुर बिनती करन जनु आइओ” तथा “खालसा मेरो रूप है खास” जैसे पवित्र शब्द-कीर्तन का भावपूर्ण गायन किया गया, जिससे समूची संगत गुरुबाणी के रस में डूबकर भाव-विभोर हो उठी।

इस अवसर पर गुरु गोविंद सिंह जी की महान जीवनी एवं खालसा पंथ की स्थापना पर कीर्तन-कथा के माध्यम से प्रकाश डाला गया, जिससे संगत को गुरु इतिहास की प्रेरणादायक जानकारी प्राप्त हुई। गुरुद्वारा गुरु का ताल के समागम में पधारे बाबा राजेंद्र सिंह इंदौलिया ने समूह संगत को लख-लख बधाइयां दीं, प्रबंधक कमेटी द्वारा बाबा जी का सत्कार करते हुए उन्हें गुरु का सरोपा भेंट किया गया।

समापन अवसर पर ज्ञानी अमरीक सिंह द्वारा अरदास एवं हुक्मनामा लिया गया। इसके उपरांत अटूट लंगर की सेवा निरंतर चलती रही, जिसमें सभी धर्मों के लोगों ने एक साथ बैठकर लंगर छका और गुरु महाराज जी का धन्यवाद किया तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया। समागम के दौरान संगतों ने एक-दूसरे को बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं दीं और गुरु घर की खुशियों को साझा किया।

गुरुद्वारा श्री कलगीधर, सदर बाजार में मुख्य रूप से प्रधान रमन साहनी, रविंद्र सिंह ओबरॉय, गुरु सेवक श्याम भोजवानी, सुरजीत छाबड़ा, बंटी ओबेरॉय, बबलू अर्शी, हरभजन सिंह, निर्मल सिंह, हेमंत भाई, संजय सेठ आदि मौजूद रहे।

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