धर्म

Agra : चित्रकूट के स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज के मुखारबिन्द से बही श्रीराम कथा की गंगा

रामकथा शशि किरण समाना, संत चकोर करहिं जेहि पाना

राम सरिस वर दुल्हन सीता, समदि दशरथ जनक पुनीता…,

मनोहर समाचार, आगरा। रामकथा चंद्र की शीतल किरणों समान और इस कथा को सुनने वाला हर श्रद्धालु संत चकोर के समान है। ऐसी श्रीराम कथा में सियाराम विवाह उत्सव में एक ओर जहां देव आसमान से पुष्प वर्षा कर रहे थे वहीं समाधि में लीन संत मंगल गीतों पर झूम रहे थे। राम सरिस वर दुल्हन सीता, समधि दशरथ जनक पुनीता…,।

चित्रकूट धाम बने कथा स्थल पीएस गार्डन में आयोजित श्री राम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने आज ताड़का वध, सीता स्वयंवर व सियाराम विवाह की कथा का भक्तिमय वर्णन किया।

श्रीराम ने जैसे ही शिवजी के प्रचंड धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा कर भंग किया तो हर ओर सियाराम के उद्घोष गुंजायमान हो उठे। विवाह उत्सव के मंगल गीत और नृत्य करते श्रद्धालु मानों मिथिला में विवाह उत्सव में शामिल हुए हों। स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि संत का अर्थ केवल भेष नहीं उद्देश्य भी होता है। उद्देश्य पवित्र नहीं तो संत का भेष भी खराब है। राम ने रावण को और हनुमानजी ने राक्षस कालनेमी को दंडित किया। क्योंकि साधु का भेष रावण ने सीता का हरण किया और कालनेमी ने हनुमान जी को भ्रमित किया। जिसके जीवन में कृपा करने का स्वभाव और करुणा हो वही संत है। कथा विश्राम के उपरान्त चारों दूल्हों (स्रीराम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न) की आरती व प्रसाद वितरण किया गया। संध्या काल में सुन्दरकाण्ड का पाठ किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से लोकेशानन्द महाराज, पुण्डरीकाक्ष वेदान्ती महाराज आयोजन समिति के अध्यक्ष राम सेवक शर्मा (जय भोले) व महामंत्री धर्मेन्द्र त्यागी, मुख्य यजमान सिलेंद्र विथरिया, हाकिम सिंह त्यागी, रणवीर सोलंकी, पं. किशोर लवानिया, दीनदयाल मित्तल, हाकिम सिंह त्यागी, आचार्य राहुल, ऋषि उपाध्याय, रामवीर सिंह चाहर, अशोक फौजदार, रामवीर सिंह, अशोक फौजदार महावीर त्यागी, किशोर लवानिया, रनवीर सोलंकी, सौरभ शर्मा, सतेंद्र पराशर, जितेंद्र प्रधान, राजेंद्र बरुआ, भगवान दास, राकेश मंगल, रविन्द्र सिंह, मुरारी लाल त्यागी, सोम मित्तल, किशन यादव, ऋषि वित्तरिया, सोम मित्तल, डॉ. अनिल शर्मा आदि उपस्थित रहे।

प्रातः काल उठ के रघुनाथा, मात-पिता गुरु नावहि माथा…
स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि माता-पिता और संतों के आर्शीवाद से शक्ति प्राप्त होती है। अपने बच्चों में ब्रह्म मुहूर्त में उठने के संस्कार डालें। परन्तु आजकल के माता तो खुद ही देर से उठते हैं। मां सरस्वती की कृपा प्रातः जल्दी उठने से ही होती है। गृहस्थ लोगों के जीवन की सबसे बड़ी साधना बच्चों को संस्कारवान बनाना है। आलस्य राक्षसत्व का कम करता है। जैसे जैसे सुख सुविधाएं बढ़ी मनुष्य आलसी हो गया। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। किसी विशेष कारण से देर उठते हैं तो अलग बात है, अन्यथा सुखी जीवन के लिए खुद में परिवर्तन करें।

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