Agra : प्रेम ही सर्वोच्च योग जो किसी तर्क और उपदेश से नहीं बंधता

-महारानी बाग में श्रीमद्भागवत कथा में महारास, नंदबाबा का यमुना जी में प्रवेश, कंस वध, गोपी-उद्धव संवाद का हुआ भक्तिमय वर्णन
मनोहर समाचार, आगरा। प्रेम ही सच्चा योग है जो किसी तर्क और उपदेश से नहीं बंधता। ज्ञान और भक्ति के अनूठे संगम गोपी-उद्धव संवाद ने सभी श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया। जब कृष्ण ने गोकुल की व्यथा समझकर उद्धव को संदेश देने गोकुल भेजा, तब गोपियाँ उनके ज्ञान-उपदेश से अधिक कृष्ण के वियोग को सत्य मानती रहीं। उन्होंने उद्धव को समझाया कि ‘प्रेम ही सर्वोच्च योग है, जो किसी तर्क या उपदेश से नहीं बँधता।

बोदला, महारानी बाग में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज भगवताचार्य दिनेश दीक्षित जी ने महारास, नंदबाबा का यमुना जी में प्रवेश और स्वगर्ग जाना, कंस वध की कताका भक्तिमय व्याख्यान किया।

नंदबाबा एक बार यमुना में स्नान करने गए, जहाँ वरुण के सेवकों ने भूलवश उन्हें पकड़ लिया। कृष्ण के हस्तक्षेप से न केवल नंदबाबा मुक्त हुए, बल्कि जललोक के देवताओं का भी आशीर्वाद मिला। बताया कि नंदबाबा को गरुड़ द्वारा स्वर्ग ले गया, जहाँ देवताओं ने उनका सम्मान करके पुनः पृथ्वी पर वापस भेजा। घटना का सार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवत भक्ति में लीन व्यक्ति सदैव दिव्य संरक्षण से आच्छादित रहता है। महारास केवल नृत्य नहीं, अपितु आत्मा और परमात्मा के मिलन की सर्वोच्च अनुभूति है, जहाँ हर गोपी को यह प्रतीति होती है कि भगवान केवल उसके साथ हैं।

श्रीकृष्ण के मथुरा आगमन, धनुष-यज्ञ विफल करने और कंस का वध कर जेल में बंद देवकी-वसुदेव को मुक्त कराने की कथा सुनाकर व्यासपीठ ने स्पष्ट किया कि यह प्रसंग ‘धर्म की विजय और अत्याचार के अंत’ का प्रतीक है। कथा में यशी राघव कृष्ण और भूमि राघव रुक्मणि का स्वरूप रखकर पहुंची।

इस अवसर पर मुख्य रूप से भूपेन्द्र चौधरी और रेणु चौधरी, रीना अग्रवाल, ऋषि शर्मा, सतीश सोलंकी, भव्या, मेजर बरखा, प्रीति शर्मा, कमलेश गुप्ता, मनीष शर्मा, अजय राजपूत, अरविंद दुबे, कुशाग्र आदि उपस्थित रहे।





