Agra : धन या परिधान से नहीं स्वभाव से बनते हैं महात्मा
भगवान कपिल, विदुर और सति चरित्र का हुआ संगीतमय वर्णन, कल होगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

-बोदला महारानी बाग में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज राजा परिक्षित को श्राप
मनोहर समाचार, आगरा। महात्मा की परिभाषा उसके परिधान या धन वैभवता नहीं बल्कि उसका स्वभाव होता है। संत वही है जो सम्पूर्ण विश्व को अपना अंग समझे। विश्व कल्याण की बात करे। चाकू एक आतंकवादी, चोर और सर्जन दोनों के हाथ में होता है। परन्तु दोनों के उद्देश्य अलग हैं। एक जीवन देता है और एक जीवन लेता है। संतों की शरण से ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग मिलता है।

बोदला महारानी बाग में योजित श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन व्यासपीठ पर विराजमान महाराज दिनेश दीक्षित जी ने गुरु महिमा की व्याख्या करते हुए कहा कि “सच्चा गुरु ही व्यक्ति को आत्म ज्ञान की ओर लेकर जाते हैं। जीवन चाहे कितना भी भ्रमित क्यों न हो, भक्ति, ज्ञान और सत्य हमें सदैव मुक्ति की ओर ले जाते हैं। श्रंगी ऋषि द्वारा राजा परीक्षित के श्रापित होनेपर आध्यात्म पथ चलकर शुकदेव जी से मोक्ष के मार्ग प्राप्त करने की कथा का वर्णन किया।
परीक्षित ने जीवन के अंतिम सात दिनों में परम सत्य की खोज का निर्णय लिया। इसी क्षण प्रकट हुए महायोगी शुकदेव जी, जिन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण के माध्यम से राजा को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का ज्ञान प्रदान किया। विदुर चरित्र के माध्यम से धर्म, नीति और ज्ञान की ज्योति के भेद को समझाया वहीं सती चरित्र की व्याख्या में शिव भक्ति को व्यक्त किया। कथा में छाप, तिलक सब छीनी…, संतन के संग लाग रे, तेरी अच्छी कटेगी… जैसे भजनों पर श्रद्धालू भक्ति की गंगा में डूबकर खूब नृत्य किया। कथा विराम के उपरान्त सभी भक्तों ने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के डॉ. जीएस राणा, अनीता राणा, संयोजक डॉ. अरुण प्रताप सिंह, सारिका अग्रवाल और संदीप अग्रवाल, कृष्णा अरुण त्यागी, रजनी मित्तल, महेश चंद्र,राजरानी, ममता, कावेरी बिल्डर फौजदार साहब, रेनू चौधरी प्रवीण कुमार,ममता कटारा,हरदेव शर्मा, शिवम कटारा।





