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Mumbai : पंचतत्व में विलीन हुए फिल्म इंडस्ट्री के ही मैन धर्मेन्द्र

लोगों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहेंगे धर्मेन्द्र

मनोहर समाचार, मुंबई। दशकों तक अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले दिग्गज अभिनेता धर्मेंन्द्र फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह गए। वीरू और जय की जोड़ी से मशहूर अभिनेता के चले जाने से सभी स्तब्ध हैं। पंचतत्व में विलीन होने पर अभिनेता सन्नी देवल ने उन्हें मुखाग्नि दी। बॉलीवुड के जाने माने एक्टर का 89 की उम्र में निधन हो गया। विर्ले पार्ले शमशान घाट से निकलते हुए हेमा मालिनी हाथ जोड़े नजर आईं। इस दौरान उन्हें श्रद्धांजलि देने अमिताभ बच्चन संग उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी पहुंच चुके।

धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल का जन्म 8 दिसंबर, 1935 को पंजाब के नसराली गाँव में हुआ था। एक स्कूल-टीचर के बेटे के तौर पर पले-बढ़े, उनके मन में अपने गाँव के माहौल से कहीं आगे की ख्वाहिशें थीं। 1958 में उन्होंने फ़िल्मफ़ेयर मैगज़ीन और बिमल रॉय प्रोडक्शंस द्वारा आयोजित एक देशव्यापी टैलेंट सर्च जीता, जिसने उन्हें मुंबई और फ़िल्मी मंच पर पहुँचाया। उनकी पहली फ़िल्म इसके तुरंत बाद आई “दिल भी तेरा हम भी तेरे (1960) हालाँकि यह कमर्शियली ज़्यादा नहीं चली।

आपको बतादें धर्मेंद्र को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 1 नवंबर को भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें 12 नवंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। इसके बाद से ही उनकी घर पर ही देखरेख की जा रही थी। आज उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। धर्मेंद्र के दुनिया से जाने के बाद पूरी इंडस्ट्री में मातम पसर गया है। काफी समय से उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। इसके बाद से ही धर्मेंद्र के लिए लोग दुआ कर रहे थे, लेकिन आज उन्होंने आखिरी सांस ली। दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र के परिवार पर इस वक्त दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

1960 के दशक की शुरुआत में, धर्मेंद्र ने अनुपमा (1966) और फूल और पत्थर (1966) जैसी फ़िल्मों से अपनी रेंज दिखाई—बाद वाली फ़िल्म ने उन्हें एक लीडिंग एक्टर और हिंदी सिनेमा के पहले एक्शन स्टार्स में से एक के तौर पर पहचान दिलाई।

1970 के दशक तक, वह हिंदी फ़िल्मों में एक बड़ी ताकत बन गए। उन्होंने चुपके चुपके (1975) में कॉमेडी से दर्शकों को लुभाया, रोमांटिक रोल में अपनी काबिलियत साबित की, और हाई-वोल्टेज एक्शन में बेहतरीन काम किया। शोले (1975) में “वीरू” के तौर पर उनकी परफॉर्मेंस न सिर्फ़ आइकॉनिक बनी बल्कि इस फ़िल्म को भारतीय सिनेमा में एक अहम मोड़ के तौर पर पक्का करने में भी मदद की।

अभिनेता धर्मेंद्र बेशक हमें अलविदा कह गए हैं, लेकिन वो दर्शकों और फेन्स के दिल में हमेशा जिन्दा रहेंगे। उनका अभिनय, फ़िल्में और प्यार सदियों तक याद किया जाता रहेगा। उनके पीछे भरा पूरा परिवार है।

 

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