Agra : पिय हिय की सिय जान निहारी, मनि मुदरी मन मुदित उतारी…
प्रतिकूलता में अनुकूलता का साम्राज्य स्थापित किया श्रीराम ने

-सीताराम चरण रति मोरें, अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरे…
-व्यासपीठ पर विराजमान चित्रकूट के स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज के मुखारबिन्द से बही श्रीराम कथा की गंगा, वन गमन और केवट प्रसंग सुन भावमुग्ध हुए श्रद्धालु
मनोहर समाचार, आगरा। विवाद को संवाद में बदलने का प्रयास ही रामत्व है। प्रतिकूलता में अनुकूलता का साम्राज्य स्थापित किया श्रीराम ने। इसीलिए अयोध्या के साम्राज्य को छोड़कर वन को गए। सियाराम का कोई निजि सुख और दुख नहीं। भक्तों का सुख-दुख ही सियाराम का भी सुख-दुख है। भगवान से मांगना है तो भरत और केवट की तरह मांगों। माता-पिता से मांगा नहीं जाता। सिर्फ चरणों की सेवा की जाती है। चित्रकूट धाम बने कथा स्थल पीएस गार्डन में आयोजित श्री राम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु राम नंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने आज सियाराम के लक्ष्मण संग वन गमन और केवट कथा का वर्णन किया तो हर भक्त भक्ति की गंगा में डुबकी लगाते हुए भावमुग्ध हो उठा।

श्रीराम की वन गमन की कथा के माध्यम से संदेश देते हुए कहा कि मोह में फंसकर हम कर्तव्य से दूर हो गए तो हम विफल हो जाते हैं। लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। मोह को छोड़कर नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे बढ़ना चाहिए। विचार करो, समर्थन करके क्रियान्वयन भी करो। पिय हिय की सिय जान निहारी, मनि मुदरी मन मुदित उतारी, कहेउ कृपा लेहि उतराई, केवट चरण गहे अकुलाई… दोहे के माध्यम से आज के दम्पतियों को सलाह देते हुए कहा कि विपरीत परिस्थिति में पति को पत्नी का और पत्नी को पति का साथ नहीं त्यागना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य रूप से महामंडलेश्वर स्वामी श्री यति नरसिंह नंद गिरी जी महाराज, डासना महामंडलेश्वर श्री रामदास जी महाराज ददरोआ धाम, आयोजन समिति के अध्यक्ष राम सेवक शर्मा (जय भोले) व महामंत्री धर्मेन्द्र त्यागी, मुख्य यजमान सिलेंद्र विथरिया, हाकिम सिंह त्यागी, रणवीर सोलंकी, पं. किशोर लवानिया, दीनदयाल मित्तल, ऋषि उपाध्याय जी, डॉ. उदिता त्यागी गाजियाबाद, श्रीनिवास विथरिया जी, राजू शर्मा सुशील बत्रा, पप्पू, विष्णु बिहारी त्यागी, अशोक मित्तल, हाकिम सिंह त्यागी, आचार्य राहुल, ऋषि उपाध्याय, रामवीर सिंह चाहर, अशोक फौजदार, रामवीर सिंह, अशोक फौजदार महावीर त्यागी, रनवीर सोलंकी, सौरभ शर्मा, सतेंद्र पराशर, जितेंद्र प्रधान, राजेंद्र बरुआ, भगवान दास, राकेश मंगल, रविन्द्र सिंह, मुरारी लाल त्यागी, सोम मित्तल, किशन यादव, ऋषि वित्तरिया, सोम मित्तल, डॉ. अनिल शर्मा आदि उपस्थित रहे।

विपरीत परिस्थितियों में भी नीति और भगवान से प्रीति न छोड़ें
स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने कहा कि केवट ने गरीबी भोगी परन्तु नीति को नहीं छोड़ा। भगवान से प्रीत नहीं छोड़ी। आजकल गरीबी में लोग भगवान से प्रीत छोड़ देते हैं। रूठ जाते हैं। शिक्षा लो कि कैसी भी परिस्थिति हो नीति नहीं छोड़नी चाहिए। नीति और भगवान के चरणों से प्रीति का पालन करो। सुदामा जी ने भी निति और प्रीति नहीं छोड़ी। भक्ति का खजाना सबसे बड़ी और वास्तविक पूंजी है। इसे प्राप्त करना सबसे बड़ी उपलब्धि है। दशरथ और केवट की प्रीति में अन्तर समझाते हुए कहा कि प्रेम के साथ नीति भी होनी चाहिए। प्रतिबंधित प्रीति नहीं होनी चाहिए। बंधन प्रेम में कुंठा होती है। दशरथ श्रीराम को अयोध्या में ही रखना चाहते है। केवट सिर्फ चरणामृत का पान करना चाहता था। इसीलिए श्रीराम ने केवट के प्रेम को अधिक महत्व दिया। ऐसे ही आजकल के माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर नहीं जाने देना चाहते।

आज के बच्चे भविष्य और कर्णधार दोनों
स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने बच्चे हमारा भविष्य और कर्णधार हैं। सरकार कोई भी हो, उनका आत्मबल कमजोर किया गया तो निश्चित रूप से राष्ट्र भी कमजोर हो जाएगा। इसलिए ऐसा कोई निर्णय न लें जिससे बच्चों में उदासीनता आ जाए। बच्चों को प्रतिभाओं को कुचलने के बजाय प्रोत्साहन देना चाहिए। इसके भयावह परिणाम होंगे। धर्म और राष्ट्र दोनों बच्चों के हाथ में हैं। इनका सुन्दर संस्कारों से श्रंगार करना चिहाए।





