Agra : रफ्तार नहीं, नियम बचाते हैं जीवन
आरटीओ कार्यालय एवं मनोरम ग्रुप की पहल पर डावर शू फैक्ट्री में यातायात सुरक्षा कार्यशाला

मनोहर समाचार, आगरा। तेजी से बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और आम नागरिकों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से आरटीओ कार्यालय एवं मनोरम ग्रुप द्वारा यातायात सुरक्षा माह के अंतर्गत आगरा–मथुरा रोड स्थित डावर शू फैक्ट्री परिसर में यातायात सुरक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आरटीओ अखिलेश द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चतुर्वेदी, एआरटीओ आलोक अग्रवाल एवं कार्यक्रम अध्यक्ष एवं मनोरम ग्रुप के चेयरमैन राममोहन कपूर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोरम ग्रुप के चेयरमैन राममोहन कपूर ने कहा कि वाहन चलाते समय जागरूकता और संयम ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। उन्होंने बताया कि देश में सड़क दुर्घटनाएं सबसे अधिक तमिलनाडु में होती हैं, लेकिन दुर्घटनाओं में मृत्यु दर उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है। उत्तर प्रदेश में भी आगरा प्रतिदिन औसतन 44 सड़क दुर्घटनाओं के साथ चिंताजनक स्थिति में है। इसके पीछे प्रमुख कारण तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और एक पंक्ति में वाहन न चलाने की आदत है। उन्होंने बताया कि कुल सड़क दुर्घटनाओं में 52 प्रतिशत शिकार दोपहिया वाहन चालक होते हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत गलत दिशा में वाहन चलाने के कारण दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। उन्होंने सड़क संकेतों, नियमों और सुरक्षित ड्राइविंग की विस्तार से जानकारी दी।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में 48 प्रतिशत पीड़ित पैदल यात्री या साइकिल सवार होते हैं। उन्होंने कहा कि हेलमेट सिर की गंभीर चोट से काफी हद तक बचाता है, लेकिन अत्यधिक तेज टक्कर की स्थिति में उसकी भी सीमाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का जीवन शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित होता है।
उन्होंने फैक्ट्री संचालकों से अपील की कि श्रमिकों के परिवहन में प्रयुक्त बसों में सीट बेल्ट और इमरजेंसी निकास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही गोल्डन आवर के दौरान मदद करने वालों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नए नियमों की जानकारी देते हुए कहा कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिलाया-डुलाया या पलटाया नहीं जाना चाहिए, इससे रीढ़ की हड्डी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
विशिष्ट अतिथि चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और उद्योग जगत की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में काम करने वाले श्रमिक प्रतिदिन सड़कों पर सफर करते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सबका नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन किसी मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हेलमेट, सीट बेल्ट और गति सीमा जैसे नियम जीवन रक्षक हैं और इनका पालन करने से असंख्य परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है। उन्होंने उद्योग प्रबंधन से अपील की कि वे अपने कर्मचारियों को नियमित रूप से यातायात सुरक्षा के प्रति जागरूक करें और सुरक्षित परिवहन को अपनी प्राथमिकता बनाएं।
मुख्य अतिथि आरटीओ अखिलेश द्विवेदी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मानव त्रुटि के साथ-साथ रोड इंजीनियरिंग भी एक महत्वपूर्ण कारण है। उन्होंने बताया कि गलत रोड इंजीनियरिंग से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग द्वारा निरंतर अध्ययन और सुधार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं, लेकिन उनका उपयोग करना आमजन की जिम्मेदारी है। यदि पैदल यात्री फुट ओवरब्रिज का प्रयोग करें, तो सड़क पर होने वाली टक्करों में निश्चित रूप से कमी आएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिदिन आरटीओ द्वारा 2000 से अधिक चालान किए जाते हैं। उन्होंने वाहन स्वामियों से अपील की कि वे अपने वाहनों की भौतिक स्थिति दुरुस्त रखें, प्रपत्र अपडेट रखें और यह सुनिश्चित करें कि चालक पूरी तरह सजग और जिम्मेदार हो, तभी दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
कार्यशाला का संचालन अनुराग जैन ने किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी लोगों ने यातायात नियमों का पालन करने और सड़क सुरक्षा के प्रति दूसरों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया।




