Agra : विश्व में पहली बार टाइगर की चारों प्रजातियों को कॉफी टेबल बुक में हर विजय सिंह करेंगे प्रदर्शित
स्वयं फोटो लेने वाले उद्यमी हरविजय सिंह बाहिया बने पहले फोटोग्राफर

आगरा के हरविजय सिंह बाहिया ने रचा इतिहास
दुर्लभ ‘ब्लैक टाइगर’ को कैमरे में कैद कर भारत को दिलाया वैश्विक गौरव
ओडिशा के सिमलीपाल जंगल में 20 जनवरी को हरविजय सिंह बाहिया को मिली थी सफलता
अब तक सिर्फ ट्रैप कैमरे के माध्यम से ही ब्लैक टाइगर की तस्वीरें ली जा सकी थी।
मनोहर समाचार, आगरा। ‘रॉक स्टार ऑफ बेरा’ और ‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ जैसी चर्चित कॉफी टेबल बुक्स के माध्यम से वन्य जीवन की अनदेखी दुनिया को अपनी फोटोग्राफी से जीवंत करने वाले आगरा के सुप्रसिद्ध उद्यमी, खेल प्रेमी, कार रेसर एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर हरविजय सिंह बाहिया के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।

75 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद, जंगल की कठिन परिस्थितियों, जोखिम और शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि जुनून और संकल्प के आगे उम्र केवल एक संख्या मात्र है।
जीवन के सात दशक से अधिक बिताने के बाद जंगल की रहस्यमयी, जटिल और अनसुलझी दुनिया को अपने कैमरे में कैद करने की उनकी साधना ने उन्हें अब वैश्विक स्तर पर एक विशेष रिकॉर्ड की ओर अग्रसर कर दिया है।
वर्तमान समय में दुनिया भर में ब्लैक टाइगर की प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है। पूरे विश्व में इनकी संख्या मात्र 8 से 10 के बीच मानी जाती है और ये केवल ओडिशा के सिमलीपाल जंगल में पाए जाते हैं। इन ब्लैक टाइगर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये सामान्य दृष्टि से सदैव छिपे रहते हैं—इन्हें देख पाना भूसे के ढेर में सुई खोजने जैसा होता है।
इसी दुर्लभ क्षण को 20 जनवरी को दोपहर 12:14 बजे हरविजय सिंह बाहिया ने अपने कैमरे में कैद कर इतिहास रच दिया। घने जंगलों के बीच पीले धरातल पर चौड़ी काली धारियों से सुसज्जित ब्लैक टाइगर की यह तस्वीर अत्यंत दुर्लभ है। वन विभाग के कर्मियों के अतिरिक्त किसी निजी फोटोग्राफर द्वारा लिया गया यह संभवतः पहला प्रत्यक्ष फोटोग्राफ माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आगरा के प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स द्वारा एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सूर्य नगर स्थित ग्रीन बीन्स में आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ फोटोग्राफर ललित राजोरा, अनिल शर्मा, वेदपाल धर, हर्षदीप उप्पल, अर्पण भार्गव, आनंद तिवारी एवं रिंकू शर्मा उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर ललित राजोरा ने बताया कि ब्लैक टाइगर भारत में केवल ओडिशा के जंगलों में ही पाए जाते हैं और इन्हें बहुत ही कम लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा है। इससे पूर्व ट्रैप कैमरे के माध्यम से एक अन्य भारतीय फोटोग्राफर ने ब्लैक टाइगर की तस्वीर ली थी, जिसमें लगभग 6 माह की प्रतीक्षा और करीब 2 करोड़ रुपये का खर्च आया था। जबकि हरविजय सिंह बाहिया ने यह उपलब्धि बिना ट्रैप कैमरे के, प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त की है, जो इसे और भी ऐतिहासिक बनाती है।
दिवंगत पत्नी से किया गया वादा कर रहे पूरा
अपनी इस उपलब्धि पर हरविजय सिंह बाहिया ने बताया कि जब वे दो वर्ष पूर्व ‘रॉक स्टार ऑफ बेरा’ कॉफी टेबल बुक पर कार्य कर रहे थे, तभी उनके मन में यह संकल्प जागा कि यह यात्रा यहीं नहीं रुकेगी। पहले बाघ, फिर शेर और अब चीता—यह सफर निरंतर आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि ‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ कॉफी टेबल बुक के विमोचन के बाद उन्होंने यह लक्ष्य तय किया था कि विश्व में पाई जाने वाली टाइगर की चारों प्रजातियाँ—ब्लैक टाइगर, बंगाल टाइगर, व्हाइट टाइगर और गोल्डन टाइगर—को वे अपने कैमरे में कैद करेंगे और एक ही कॉफी टेबल बुक में चारों के चित्रण प्रकाशित करेंगे। यह संकल्प उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी इंदू से भी लिया गया भावनात्मक वादा बताया।
इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने ओडिशा के सिमलीपाल जंगलों का चयन किया और आश्चर्यजनक रूप से पहले ही दिन उन्हें सफलता मिली।
तत्परता और साहस ने दिलाई सफलता
हरविजय सिंह बाहिया ने बताया कि वन विभाग की अनुमति से घने जंगल में प्रवेश के दौरान पहले उन्हें एक छोटा ब्लैक टाइगर खेलता हुआ दिखाई दिया। उसी समय उनके ट्रैकर बुधराम ने पेड़ों के बीच छिपे एक बड़े ब्लैक टाइगर की ओर इशारा किया। तत्परता और साहस के साथ उन्होंने उसका पीछा किया और कैमरे में कैद करने में सफलता प्राप्त की।
हरविजय सिंह बाहिया के अनुसार घने जंगलों में ब्लैक टाइगर का पीछा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए केवल 5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से वाहन चलाना, बिना पलक झपकाए लगातार नजर बनाए रखना और हर क्षण खतरे को भांपते रहना पड़ता है।
अब कदम अगले मिशन की ओर
अब हरविजय सिंह बाहिया का अगला मिशन असम के काजीरंगा जंगल में गोल्डन टाइगर तथा मध्य प्रदेश के रीवा में व्हाइट टाइगर को अपने कैमरे में कैद करना है। वे पहले ही बंगाल टाइगर की सफल फोटोग्राफी कर चुके हैं। यदि वे इस मिशन में सफल होते हैं, तो संभवतः पूरे विश्व में टाइगर की चारों दुर्लभ प्रजातियों को प्रत्यक्ष रूप से कैमरे में कैद कर कॉफी टेबल बुक में प्रकाशित करने वाले विश्व के पहले व्यक्ति बन जाएंगे।




