शिक्षा

Agra : शिक्षक बनने की राह में अलग-अलग ‘एफडीआर का रोड़ा’ हुआ दूर

देशभर के महाविद्यालयों को मिलेगी करोड़ों रुपए की राशि वापस

-टीचर्स एजुकेशन क्षेत्र में विशेषज्ञ व आगरा के युवा प्रकाशक पियूष भार्गव ने इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के संबंध में की आरटीआई अपील तो खुलीं आँखें

-राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने सुधारी भूल, वापस करेंगे जमा हुई अतिरिक्त एफडीआर की राशि, महाविद्यालयों को मिली राहत

मनोहर समाचार, आगरा। भारत सरकार के निर्देशों के अंतर्गत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, दिल्ली द्वारा विद्यार्थियों का भविष्य बनाने वाले शिक्षक तैयार करने के लिए शुरू किए गए 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (I-Tep) की मान्यता लेने वाले महाविद्यालयों को राहत मिली है। अब किसी महाविद्यालय को इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के के अंतर्गत बीए-बीएड, बीएससी-बीएड या बीकॉम-बीएड शुरू करने के लिए 12-12 लाख रुपये की अलग-अलग एफडीआर जमा नहीं करनी पड़ेंगी।
उल्लेखनीय है कि टीचर्स एजुकेशन के क्षेत्र में विशेषज्ञ व आगरा के युवा उद्यमी-प्रकाशक, और राखी प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पियूष भार्गव ने आरटीआई के तहत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से सवाल किया कि इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के तहत तीन पाठ्यक्रम आरंभ करने पर कितने रुपए की एफडीआर जमा करनी होगी?

इसके जवाब में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा भेजी गई नियमावली से असंतुष्ट पियूष भार्गव ने जब आरटीआई अपील की तो उन्होंने अपील का जवाब देने के लिए 20 जनवरी की तारीख तय कर दी लेकिन उससे पूर्व ही उनकी आँखें खुल गईं।

17 जनवरी, शनिवार को भूल सुधारते हुए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की उत्तर क्षेत्रीय कमेटी ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए मिनट्स में स्पष्ट कर दिया कि इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम एक ही प्रोग्राम है। अत: इसके अंतर्गत सभी पाठ्यक्रमों के लिए 12 लाख की एक ही एफडीआर ली जाएगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की भूल के चलते विभिन्न महाविद्यालयों द्वारा जमा करवाई गई अलग-अलग एफडीआर की अतिरिक्त जमा राशि भी परिषद द्वारा महाविद्यालयों को वापस की जाएगी।

पियूष भार्गव ने आरटीआई अपील और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड हुए निर्णय के प्रिंट आउट को दिखाते हुए बताया कि देशभर के महाविद्यालयों को अब करोड़ों रुपए की राशि वापस मिलेगी। साथ ही, इस पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए आवेदन करने वाले महाविद्यालय को अब केवल 12 लाख रुपए ही जमा करवाने पड़ेंगे।

शनिवार को दिनभर पियूष भार्गव को व्हाट्सएप पर महाविद्यालय संचालकों द्वारा धन्यवाद और बधाई के संदेश मिलते रहे। सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस. वी. आर्य (हिसार) ने पियूष भार्गव की इस पहल को सराहते हुए उन्हें फोन पर बधाई और धन्यवाद दिया।

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