ज्योतिष और वास्तु भी भविष्य का बेहतर विकल्प-ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र

मनोहर समाचार, आगरा। हर कोई जीवन में कामयाब होना चाहता है। ढेर सारा पैसा, आलीशान मकान, सैर सपाटा और करोड़ों के पैकेज वाली नौकरी, जिसके लिए कोई इंजीनियरिंग करता है, कोई एमबीबीएस, सीए, आर्किटेक्ट, टीचर और अब एआई। इनमें कितने लोग सफल होते हैं और कितने असफल। ये सबकुछ बेहतर प्रयास पर निर्भर करता है। लेकिन आपके प्रयासों को पुश करने वाला एक और बेहतर विकल्प ही नहीं प्रोफेशन भी बन सकता है। जी हां, जो आपको बेहतर भविष्य बनाने, जीवन को सही तरीके से जीने, लोगों की मदद करने से लेकर देश और देश की संस्कृति के संरक्षण साथ-साथ कमाई का साधन भी बन सकता है। आइए जानते हैं, ऐसे खास कोर्स के बारे में, उसी विषय के महारथी, विशेषज्ञ, प्रख्यात डॉ. अरविन्द मिश्र जी से।

सवाल-मेहनत तो बहुत की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली, समझ नहीं आया?
जवाब-मेहनत जरूरी है, चाहे कोई भी फील्ड हो, लेकिन उस मेहनत के पीछे आपके कर्म भी प्रधान हैं। कामयाबी मिल सकती है, अगर आप अपनी कुण्डली के हिसाब से व्यवधान या असफलता के लिए कुछ उपाय कर लेते हैं। निश्चित रूप से आपको कामयाबी मिल जाएगी।
सवाल-हमें जीवन को सहज और सरल तरीके से जीने के लिए क्या करना चाहिए?
जवाब-सबसे उत्तम पथ धर्म पथ है, उस पर चलकर जीवन आनंद से परिपूर्ण हो जाता है। रही बात कुछ अड़चनों की, तो उसे आप ज्योतिष के माध्यम से अपनी कुण्डली का किसी विद्वान ज्योतिषी को दिखाकर आंकलन कराएं और समाधान पाएं।
सवाल-क्या ज्योतिष भविष्य की तस्वीर दिखा सकता है?
जवाब-भविष्य में क्या होगा, क्या नहीं ये तो ईश्वर के हाथ में है, लेकिन आपकी जन्म कुण्डली को देखकर बहुत कुछ जीवन के रहस्यों को समझा जा सकता है, जो आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।
सवाल-क्या ज्योतिष और वास्तु का ज्ञान सभी को होना चाहिए?
जवाब-बिल्कुल, जिस प्रकार खाना बनाने के लिए उसकी विधि, इलाज के लिए उसकी मेडीसिन, निर्माण के लिए इंजीनियरिंग की और हर उस क्षेत्र के हुनरमंद की जरूरत होती है। ठीक उसी प्रकार जीवन को सही तरीके से जीने के लिए ज्योतिष और वास्तु विशेष मायने रखते हैं। ताकि हम हर दिन की घटनाओं को भलीभांति समझ सकें।
सवाल-आजकल हर इंसान परेशानियों से जूझ रहा है, आखिर क्यों?
जवाब-परेशानियों की बजह इंसान के कर्म हैं, या तो पूर्व के या फिर वर्तमान के, दोनों ही कारण से जीवन में मुश्किलें प्रभावी होती हैं। अगर समय रहते इनका समाधान कर लिया जाए, तो इनकी शक्ति को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसका दो ही माध्यम हैं, पहला आध्यात्म और दूसरा ज्योतिषीय समाधान।
सवाल-ज्योतिष और अध्यात्म में क्या सम्बन्ध है?
जवाब-दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, ज्योतिष एक शास्त्र है, जो हमें आध्यात्म से जोड़ता है। ज्योतिष में प्रत्येक गणना, आंकलन, समाधान आध्यात्मिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर ही किया जाता है। उदाहरण के रूप में जब बच्चे का नामकरण करते हैं, तो पहले कथा, पूजन, हवन और उसके बाद बच्चे का नामकरण और जन्म कुण्डली का निर्माण किया जाता है। इसलिए ज्योतिष आध्यात्म का ही प्रतिरूप है।
डॉ. अरविन्द मिश्र
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद
भविष्य बनाओ ज्योतिष संस्थान
संजय प्लेस, आगरा
मोबा.-9412343560




