Agra : नये प्रस्तावित बीज अधिनियम और कीटनाशक अधिनियम में प्रावधान में संशोधन किये जाने की गयी मांग
शीघ्र ही कृषिमंत्री भारत सरकार को प्रेशित किया जायेगा ज्ञापन

-नये प्रस्तावित बीज अधिनियम और कीटनाशक अधिनियम के कुछ प्राविधानो को लेकर उद्यमियों ने व्यक्त की गहरी चिंता
-नये बीज व कीटनाशक कानूनों में संतुलन की मांग
-निर्माता कंपनी व डीलर की जिम्मेदारियो को स्पष्ट रूप से अलग करने की की गयी मांग
-किसानो की सामूहिक शिकायत पर ही डीलर व निर्माता कंपनी की जिम्मेदारी की जाये तय
-डीलर्स की पहली त्रुटि पर चेतावनी का किया जाये प्राविधान
-जुर्मना और जेल की धाराओं को तर्कसंगत बनाने की की गयी मांग
मनोहर समाचार, आगरा। चैम्बर सभागार में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल की अध्यक्षता मे पूर्व अध्यक्ष जनसंपर्क एवं समन्वय प्रकोष्ठ के चेयरमैन मनीष अग्रवाल जी के नेतृत्व में आगरा सीड एवं पेस्टीसाइड डीलर्स एसोसियेशन ने नये प्रस्तावित बीज अधिनियम और कीटनाशक अधिनियम के कुछ प्राविधानो को लेकर अपनी व्यवहारिक चिंताएं व्यक्त की। एसोसियेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित कानूनों मे कुछ ऐसे प्राविधान है जिससे ईमानदार छोटे डीलर पर कानूनी दबाब पड़ सकता है।
आगरा सीड एवं पेस्टीसाईड एसोसियेशन के अध्यक्ष सुधीर चोला ने सरकार से मांग की है कि निर्माता कंपनी व डीलर की जिम्मेदारियोे को स्पष्ट रूप से अलग किया जाये। पहली बार की त्रुटि पर चेतावनी दी जाये। यू ट्यूबर के माध्यम से किसी भी शिकायत पर ध्यान न दिया जाये आजकल उनका उद्देश्य डीलर्स का शोषण करना और अनावश्यक परेशान करना हो गया है। किसानो की सामूहिक शिकायत पर ही डीलर व निर्माता कंपनी की जिम्मेदारी तय की जायेे। किसान क्षति का मुआवजा सरकार द्वारा इन्श्यूरेंस कंपनियो के प्रविधानों के आधार पर होना चाहिये। सभी डीलर व अधिाकरियों का सही से प्रशिक्षण के उपरान्त ही नये कानूनों को लागू किया जाये। आगरा सीड एवं पेस्टीसाईड एसोसियेशन के कोषाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि छोटे ग्रामीण डीलर्स के लिये प्रस्तावित प्राविधानां का पालन करना एक जटिल प्रक्रिया है। छोटे डीलर की व्यवहारिक कठिनाइयों को देखते हुए प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाये। बैठक में निरीक्षण प्रणाली पारदर्शी बनाने की मांग की गयी। जुरमाना और जेल की धाराओं को तर्कसंगत बनाया जाये। बैठक में दंडात्मक प्रणाली कठोर है जिसमें चेतावनी व सुधार का अवसर नहीं दिया गया है, छोटे बीज व्यवसायियों के लिये कोई विशेष सुरक्षा नहीं है कानूनी छोटे स्थानीय सामान और बडे पैमाने में पर उत्पादन बीज उत्पादकों में कोइ्र व्यवहारिक अंतर नहीं है, बड़े बीज संयोजन की स्पश्टता नहीं है, बीज से खराब फसल नष्ट होने की स्थिति में कंपनिपयो पर तत्काल जुर्माना और मुआवजा होने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। मुआवजा तंत्र अज्ञात और जटिल, नामांकन एवं लाइसेंस प्रक्रिया गाउंड शीट से कटी, देशी व पारंपरिक नमूनों के संरक्षण का अभाव, निरीक्षण अधिकारियों का बहुत बड़ा अधिकार आदि बिन्दुओं पर चर्चा की गयी। बैठक में तय किया गया कि चैम्बर के माध्यम से कृषि मंत्री, भारत सरकार को शीघ्र ही एक ज्ञापन प्रेषित किया जायेगा।
बैठक में चैम्बर अध्यक्ष संजय गोयल, संचालन पूर्व अध्यक्ष एवं जनसंपर्क एवं समन्वय प्रकोष्ठ के चेयरमैन मनीष अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संजय अग्रवाल, सुधीर चोला, विजय कुमार, सौरभ गुप्ता, रवि शर्मा, गौरव गुप्ता, सनी इत्यादि उपस्थित थे।





