धर्म

Agra : ‘सफर-ए-शहादत’ शहीदी सप्ताह में चमकौर और गुरु गोबिंद सिंह जी के माछीवाड़ा गमन प्रसंग वर्णित

मनोहर समाचार, आगरा। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की महान शहादत को नमन करते हुए गुरुद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर, विभव नगर में चल रहे लड़ीवार गुरमत समागम ‘सफर-ए-शहादत’ शहीदी सप्ताह के तृतीय दिवस, श्रद्धा, शौर्य और गहन भावनात्मक वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह दीवान गुरु साहिब के अद्वितीय त्याग, संघर्ष और धर्म की रक्षा हेतु दिए गए सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने के लिए समर्पित रहा।

आज के दीवान में पंथ के प्रसिद्ध कथा विचारक भाई साहिब भाई बलदेव सिंह (मोहाली वाले) ने गुरमत विचारों के माध्यम से संगत को निहाल किया। उन्होंने चमकौर की ऐतिहासिक जंग के उपरांत श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा वह स्थान त्याग कर विभिन्न स्थानों से होते हुए माछीवाड़ा के जंगल पहुँचने के अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी इतिहास का विस्तार से वर्णन किया।

कथा विचार के दौरान भाई साहिब ने बताया कि “किस प्रकार कठिन परिस्थितियों, मुगल फौजों की घेराबंदी और निरंतर संघर्ष के बीच गुरु साहिब ने अडिग विश्वास और ईश्वरीय साहस का परिचय देते हुए माछीवाड़ा के जंगलों में प्रवेश किया। इसी क्रम में उन्होंने भाई गनी ख़ाँ एवं भाई नबी ख़ाँ द्वारा गुरु साहिब की निष्काम सेवा, साहस और मानवता की अनुपम मिसाल का भावपूर्ण उल्लेख किया। कथा में यह प्रसंग भी साझा किया गया कि गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज माछीवाड़ा से ‘उच्च दे पीर’ का रूप धारण कर आगे की यात्रा पर निकले, जो सिख इतिहास में त्याग, धैर्य और विवेक का अद्वितीय उदाहरण है।

कथावाचन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि “श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन केवल युद्ध और बलिदान का नहीं, बल्कि विश्वास, करुणा, मानवता और धर्म की रक्षा हेतु सतत संघर्ष की प्रेरक गाथा है। कथा श्रवण करते हुए संगत गहरे भाव-विभोर हो उठी। समागम में हजूरी रागी भाई हरजिंदर सिंह द्वारा प्रस्तुत कीर्तन से वातावरण पूर्णतः गुरुमय हो गया। दीवान की समाप्ति उपरांत गुरु की अरदास एवं हुकुमनामा लिया।

संगत में तेजेंद्र कौर हैप्पी, जसविंदर कौर, चांदनी भोजवानी, सरबजीत कौर, स्वर्ण कौर,सिमरन कौर वडेरा, सरनजीत कौर,अंजू कालरा, कमलजीत कौर, सिमरन कौर, सुमित कौर, राधा खानचंदानी, अमनप्रीत कौर, ईश्वर कौर, परमजीत कौर, सुनीता अनेजा, कवलजीत कौर, हरजीत कौर, कुसुम वरमानी, गुरमीत कौर, रोशनी, दीपा आदि उपस्थित रहे।

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