Agra : धर्म दे रक्षक साडेगुरुद्वारे में दिखेगा आगरा के 26 गुरुद्वारों का इतिहास
आरए मूवीज के बैनर तले बन रही फिल्म धर्म दे रक्षक साडे गुरुद्वारे का बाबा प्रीतम सिंह ने श्रीफल फोड़कर किया उद्घाटन

मनोहर समाचार, आगरा। देश की रक्षा और स्वाभीमान के लिए हमेशा तलवार उठाने वाले सिख समुदाय के आस्था के केन्द्र और सेवा त्याग, भाईचारे का संदेश देने वाले गुरुद्वारों का इतिहास धर्म दे रक्षक साडे गुरुद्वारे में नजर आएगा। आगरा शहर के 26 गुरुद्वारों के परिचय को समेटी डॉक्यूमेन्द्री फिल्म में एक गाना भी होगा। गुरुद्वारे शहर की ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक सौहार्द और सिख समाज की आस्था का प्रमुख केन्द्र होने के साथ सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। जहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन और मत्था टेकने के लिए पहुंचती है। यह जानकारी फिल्म निर्माता रंजीत सामा व विजय सामा ने सिकन्दरा, गुरु का ताल स्थित गुरुद्वारे में आयोजित फिल्म के मुहूर्त अवसर पर दी। सभी ने सर्वप्रथम गुरुदारे में मात्था टेककर आर्शीवाद लिया।

फिल्म का उद्घाटन बाबा प्रीतम सिंह ने श्रीफल फोड़कर किया। कहा कि “नई व युवा पीढ़ी को अपने धर्म के इतिहास से परिचित कराने के लिए फिल्म का निर्माण सराहनीय प्रयास है। लोगों को सिर्फ 2-4 प्रमुख गुरुदारों के बारे में ही जानकारी है। फिल्म के माध्यम से शहर के सभी गुरुद्वारों के बारे में सही जानकारी प्राप्त हो सकेगी।”

फिल्म निर्माता विजय सामा ने बताया कि “आगरा शहर में 100 वर्ष से अधिक पुराने गुरुद्वारे हैं। पांच गुरुद्वारे मुख्य हैं, जहां गुरुओं ने अपने श्रीकमलपद रखे। जिसमें गुरु का ताल, माईथान, हाथीघाट, लोहामंडी और कैलाशपुरी रोड स्थित दमदमा साहेब का गुरुद्वारा है। बाहर से जो लोग आगरा गुरुद्वारों में आना चाहते हैं उन्हें भी फिल्म के माध्यम से सही पते के साथ सम्पूर्ण जानकारी मिल सकेगी। धर्म की समानता और सेवा की भावना को बिना किसी भेदभाव के दर्शाते लंगर सेवा सहित नियमित गुरुबाणी कीर्तन, कथा लंगर के बारे में फिल्म में बताया जाएगा।”
फिल्म का क्लेप मंजीत सिंह व अमरदेव साहनी ने दिया। स्व. राजकुमार सामा व रेनू अलग के आर्शीवाद से बनाई की जा रही फिल्म के प्रेरणा स्त्रोत वीर महेन्द्रपाल व रानी सिंह हैं। फिल्म के सहनिर्माता अनिल अरोड़ा, संजय जटाना व दीपक साहनी हैं। लेखक व निर्देशक राष्ट्रपति पदक विजेता हेमन्त वर्मा हैं। संगीत शंकर जाजवारा ने व गीत संजय दुबे ने लिखें है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रमोद महाजन, धनश्याम दास, चांद दीवान, रविकांत महाजन, रमन, आरती सामा, धर्मपाल कश्यप, अजय शर्मा, बृजेश शर्मा, हरीश आहूजा, संजय कपूर, केवल भमरी, अमरजीत आहूजा, महेश धाकड़, गोवर्धन सोनेजा, हेमन्त भोजवानी, पीके मिश्रा आदि उपस्थित रहे।





