धर्म

Agra : सही मार्ग पर चलना सिखाती है श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत कथा में अंतिम दिन हुआ कंस वध सुदामा चरित्र, द्वारिका लीला

-व्यास पूजा प्रसंग का वर्णन, कल हवन के बाद होगा भण्डारा

मनोहर समाचार, आगरा। सांसारिक दुखों से मुक्ति चाहिए तो श्रीहरि से मित्रता करिए। सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र को विपत्ति में साथ दे। उसे अपने से नीचा रखने के बजाय समकक्ष बनाने का प्रयास करें। बोदला, महारानी बाग में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ पर विराजमान भगवताचार्य दिनेश दीक्षित जी ने सुदामा चरित्र का वर्णन किया।

कहा कि मित्रता का अर्थ स्वार्थ नहीं, बल्कि सहयोग और समर्पण होना चाहिए। सच्ची मित्रता हमें प्रभु के चरणों में ही मिल सकती है। सुदामा के द्वारिका से लौटने पर अपनी कुटिया के स्थान पर खड़े ऊंचे महल देखकर वह डर गए।
श्रीकृष्ण के रुक्मणी, सत्यभामा, जामवती सहित सभी 16108 विवाह और रानियों की कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। बृज की गोपियां, नन्द बाबा, यशोदा का कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय स्नान करने पहुंचने पर हुए मिलन की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया।

राजा परीक्षित की मोक्ष प्राप्ति की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि “कथा के प्रत्येक स्कंध में जीवन, धर्म, भक्ति, सृष्टि और भगवान विष्णु के दिव्य अवतारों का वर्णन सुनकर राजा परीक्षित का मन पूर्णतः निर्मल होता गया।”

सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से राजा का देहावसान हुआ, किंतु शुकदेवजी के वचनों की अमृतवर्षा के कारण राजा परीक्षित ने बिना भय, बिना मोह के परम सत्य को प्राप्त किया। भागवत संकेत देती है कि श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान—इन तीनों के संगम से मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पा सकता है। कथा में सारिका अग्रवाल सुदामा, शिवानी कटारा कृष्ण और सलोनी रुक्मणी के स्वरूप में पहुंची। अंत में आरती कर सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के डॉ. जीएस राणा, डॉ. अरुण प्रताप सिंह, महेशचंद, राजरानी, रीना कुशवाह, शीला बहल, नीता टंडन, यादराम सिंह, सचिन सोलंकी, शोबा गोयल आदि उपस्थित रहीं।

30 नवम्बर को हवन के बाद होगा भण्डारा
श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर आज सुबह 9 बजे मंत्रोच्चारण के साथ विधि विधान से यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके उपरान्त दोपहर 2 बजे से देर रात तक भण्डारे का आयोजन किया जाएगा।

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