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Agra : भए प्रकट कृपाला दीन दयाला, कौशल्या हितकारी

श्रीमद्भागवत कथा में श्रीराम व श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव की कथा में हुई उपहरों की वर्षा, राधा रानी संग श्रीहरि और सियाराम के जयकारों से गूंजा कथा पंडाल

मनोहर समाचार, आगरा। हर तरफ श्रीहरि के जयघोष से गुंजायमान कथा पंडाल में भक्ति की गंगा बह रही थी। भगवान के जन्म पर लुटाए गए, उपहारों को प्रसाद स्वरूप पाने की लालसा और गोप गोपी के स्वरूप में सज धज कर पहुंचे झूमते नाचते भक्तजन मानों अयोध्या और गोकुल में उत्सव मना रहे हों। श्रीकृष्ण व श्रीराम के प्राकट्योत्सव की कथा के मौके पर पंडाल को आज गुब्बारों व सतरंगी पुष्पों से सजाया गया। बधाईयां गाई गई और शंखनाद के साथ उपहार बंटे। बाल रूप में कन्हैया के दर्शन को हर भक्त ललायित था।


बोदला, महारानी बाग में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन श्रीराम व श्रीकृष्ण की प्राकट्योत्सव कथा का वर्णन करते हुए भगवताचार्य दिनेश दीक्षित जी ने भक्त ध्रुव व प्रह्लाद चरित्र, अजामिल और जड़ भरत की कथा का भी भक्तिमय वर्णन किया। कहा कि “भक्त ध्रुव व प्रह्लाद की कथा हमें दृढ़निश्चय और विश्वास से हर बाधा को पार करने का साहस प्रदान करती है। ईश्वर का नाम जीवन में किसी भी क्षण मोक्ष का द्वार खोल सकता है।”

वहीं जड़ भरत की कथा के माध्यम से आत्मा और परमात्मा के वास्तविक सम्बंध के बोध की व्याख्या की। समुन्द्र मंथन की कथा के माध्यम से बताया कि “जीवन में अमृत सबसे अंत में मिलता है। शिव की तरह पुजने के लिए विषपान करना पड़ता है। गोमाता की महिमा को गैय्या लागत अति प्यारी, जग पालन हारी… भजन के माध्यम से बताया। सरिता अग्रवाल नन्दबाबा, भूमि राघव यशोदा बनी।

इस अवसर पर मुख्य रूप से ओम बिहारी, राजीव सोलंकी, डॉ. विपिन कुमार, हेमन्त चलनी वाले, धर्मवीर सिंह, लाल सिंह लोधी, अशोक शर्मा, आशा, दिलीप स्वामी, भूपेन्द्र सिंह परिहार, सुधाकर त्यागी, नीरज जैसवाल, कृष्णा, विनोद कौशिक, वीना, स्नेहलता, प्रीति राना, बृजेश चंद शर्मा, त्रिलोकी नाथ आदि उपस्थित रहे।

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