Lucknow : दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’: ज्ञान, धर्म और जीवन जीने की कला का महासंगम
आगरा से दर्जनों श्रद्धालुओं ने संयोजक मनोज गुप्ता के नेतृत्व में आयोजन में हुए शामिल

मनोहर समाचार, लखनऊ। जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित दो दिवसीय ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव मात्र एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत और सार्वभौमिक ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा। उत्सव कई मायनों में विशेष रहा और इसने समाज को एक अमूल्य प्रेरणा दी। साथ ही कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत जी की उपस्थिति ने इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया। पूज्य गुरुदेव गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज की दिव्य उपस्थिति के साथ दोनों प्रमुख हस्तियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और अपने उद्बोधन से श्रोताओं का मार्गदर्शन किया। उनकी सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि गीता का संदेश किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक ‘दिव्य मंत्र’ है।

श्रीकृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार’ और प्रेरणा उत्सव के प्रेरणा पुंज गीता मनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि “स्मार्ट सिटी का क्या लाभ, जब स्मार्ट सिटीजन ही न हों, इसलिए गीता का ज्ञान लोगों को स्मार्ट बनाने के लिए आवश्यक है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि “भगवद्गीता केवल पूजा या धर्म की एक विधि नहीं है, बल्कि यह ‘जीवन जीने की कला’ है।” उन्होंने कहा कि “गीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोक हर सनातनी के लिए मार्गदर्शक मंत्र हैं, जो जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।” उन्होंने गीता को 140 करोड़ भारतवासियों के लिए एक दिव्य मंत्र बताया।

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने गीता के मूल संदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “यह हमें समस्याओं से भागने के बजाय, उनका डटकर सामना करना सिखाती है, उन्होंने श्रोताओं से आह्वान किया कि वे केवल गीता पढ़ने वाले नहीं, बल्कि ‘गीताजीवी’ बनें, यानी गीता को अपने जीवन में उतारें।” उन्होंने व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि “यदि प्रतिदिन केवल दो श्लोकों का भी पाठ और मनन किया जाए, तो एक वर्ष में ही जीवन गीतामय हो जाएगा।”

‘जीओ गीता परिवार’ द्वारा आयोजित यह उत्सव इसी दिशा में एक सार्थक कदम था। उत्सव में केवल व्याख्यान ही नहीं थे, बल्कि शंख ध्वनि के साथ ही सामूहिक वंदे मातरम व राष्ट्रगान के साथ भारत मां की स्तुति से देशभक्तिमय वातावरण का निर्माण हुआ। साथ ही सुंदर भजन प्रस्तुति से लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने का भी एक माध्यम बना।

पूज्य संतों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की। पूज्य स्वामी परमात्मानंद गिरी जी महाराज अखिल भारतीय आचार्य महासभा के महासचिव हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “गीता का पहला शब्द ‘धर्म’ है और अंतिम शब्द भी ‘धर्म’ है, अतः यह हमें धर्म का संदेश देती है।” उन्होंने कर्मयोग के माध्यम से धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने पर जोर दिया।

जगतगुरु रामानुजाचार्य पूज्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि “पर्यावरण का समाधान भी गीता में निहित है।” उन्होंने वैदिक मंत्रों से यज्ञ, जल संरक्षण और प्रकृति की रक्षा करने का आह्वान किया। जगतगुरु पूज्य स्वामी संतोषाचार्य सतवा बाबा जी, पूज्य संत स्वामी धर्मेंद्र दास जी महाराज,स्वामी रामचंद्र दास जी महाराज,स्वामी शशिकांत दास जी महाराज एवं उपस्थित सभी पूज्य संतों ने एक स्वर में श्रीमद्भगवद्गीता को केवल अध्ययन का ग्रंथ न मानकर, उसे जीवन जीने की साधना बनाने का संदेश दिया।

आगरा से इन्होंने की भागीदारी
लखनऊ आयोजित इस कार्यक्रम में आगरा से जीओ गीता कमेटी के अध्यक्ष सुरेश बिंदल और संयोजक मनोज गुप्ता (बाबा) के नेतृत्व में लगभग 50 लोगों को बस द्वारा लखनऊ ले जाया गया। जिसमें मुख्य रूप से डॉ. राजेश शर्मा, कौशल किशोर शर्मा, पीयूष श्रीवास्तव एडवोकेट, अजय रंगीला, उर्मिला अग्रवाल, मानिक चंद, प्रदीप अग्रवाल, श्यामलता अग्रवाल, आशुतोष शर्मा, अगम गौतम आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।





