धर्म

घर को स्वर्ग बना देती है भगवान श्री सत्यनारायण की कथा

हर घर में प्रतिमाह होनी चाहिए सत्यनारायण व्रत कथा-डॉ. अरविन्द मिश्र

भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। इस व्रत कथा को कराने वाला मनुष्य कभी दुःखी नहीं रहता। उसके घर में सुख, शांति और समृद्धि का निवास होता है, जो प्रतिमाह एक या दो बार श्री सत्यनारायण की कथा कराता है। वर्तमान में हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी दुःख से पीड़ित है। ऐसे में मनुष्य को हर बाधा से मुक्त रहने का एक मात्र उपाय है और वो है भगवान श्री सत्यनारायण व्रत कथा।

विख्यात ज्योतिषाचार्य और वास्तुविद डॉ. अरविन्द मिश्र जी का कहना है कि कलयुग में आप जितना प्रभु का सुमिरन करेंगे, उतने ही सुखी रहेंगे। वर्तमान जीवन जितना जटिल और दुष्कर है, चारों तरफ लोग पाप कर्म में लिप्त हैं और बुरे कर्म करने से नहीं डरते। ऐसे में भगवान की आराधना आपको महानता की ओर ले जाती है। आइए आपको पाप नाशिनी और मंगलकारी श्री सत्यनारायण भगवान की कथा के विषय में बताते हैं।

कब करनी चाहिए सत्यनारायण की कथा?
आपको बतादें सत्यनारायण भगवान की कथा कराने का विधान केवल तीन दिन है। उनमें पहला पूर्णिमा को, दूसरा एकादशी को और तीसरा गुरूवार को। इसके अलावा बच्चे के नामकरण, गृह प्रवेश, शादी और खुशी के मौके पर भी कथा करा सकते हैं। अन्य दिनों में भगवान सत्यनारायण की कथा न कराएं। अन्यथा फल की जगह विफलता हाथ लगेगी।

कैसे करें कथा?
श्री सत्यनारायण भगवान की कथा में सर्वप्रथम पवित्र होकर पूजन की समस्त सामग्रियों को कथा स्थल पर रखा जाता है, उसके बाद वैदिक ब्राह्मण के द्वारा स्वस्तिवाचन, संकल्प, गणपति गौरी पूजन, कलश में देवताओं का आवाहन एवं पूजन, नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका, पंचलोकपाल, दशदिक्पाल आदि देवताओं के साथ श्री शालिग्राम भगवान की पूजा अर्चना विधि विधान से करके सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण किया जाता है तथा कथा श्रवण के बाद हवन के द्वारा पूर्णाहुति दी जाती है। उसके बाद श्री सत्यनारायण भगवान की आरती परिवार सहित करें और आरती को पूरे घर में घुमाएं और उपस्थित जन आरती लें और दक्षिणा थाली में डालें।

श्री सत्यनारायण कथा के लाभ
मनोकामना पूर्ति: यह कथा सुनने और कराने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सुख-समृद्धि: घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
दुखों का नाश: यह सभी प्रकार के कष्टों, दुखों और दरिद्रता को दूर करती है।
नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: कथा से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।
विवाह बाधाएं दूर: विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करके सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।
संतान सुख: संतानहीन व्यक्तियों को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।
सकारात्मकता: यह मन में श्रद्धा और सकारात्मकता का भाव उत्पन्न करती है।
यज्ञ के समान फल: पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस कथा को सुनने मात्र से हजारों वर्षों तक किए गए यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
नकारात्मकता और भय का नाश: यह व्यक्ति के मन से गलत भावनाएं, भय और मानसिक विकारों को खत्म करती है।

खास बात
भगवान श्री सत्यनारायण की कथा कराने के लिए वैदिक ब्राह्मण होना आवश्यक है। जोकि आपको विधि विधान से कथा का रसपान कराकर आपकी मनोकामना पूर्ण कराने में सही साबित होगा। कथा कराने के पश्चात ब्राह्मण को प्रेम से भोजन कराएं और उचित दक्षिणा भेंट कर चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना न भूलें, तभी आपकी कथा पूर्ण और संकल्पित होगी। ये पूरा कार्य पूर्ण मनोभाव और भगवान सत्यनारायण में आस्था प्रकट करते हुए करें।

डॉ. अरविन्द मिश्र
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद
भविष्य बनाओ ज्योतिष संस्थान
संजय प्लेस, आगरा
मोबा.-9412343560

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