Agra : शहर में चर्चा का विषय बने प्रोफेसर और शोधार्थी छात्रा से जुड़े केस में नया मोड़
“मुझे और मेरे पति को इंसाफ चाहिए, झूठे आरोपों से हो रहा है मानसिक उत्पीड़न, न्याय न मिला तो मुख्यमंत्री से करूंगी गुहार” : डॉ. कविता चौधरी पत्नी प्रो. गौतम जैसवार

मनोहर समाचार, आगरा। शहर में चर्चा का विषय बने प्रोफेसर तथा शोधार्थी छात्रा से जुड़े कथित शारीरिक शोषण मामले में नए मोड़ आते हुए आरोपी प्रो. गौतम लाल बिहारी जैसवार की पत्नी डॉ. कविता चौधरी ने अपने अधिवक्ताओं के साथ मीडिया के समक्ष आईं और अपने पति की बेगुनाही का दावा किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “यह मामला पूरी तरह से सुनियोजित षड्यंत्र है और उनके पति को बिना गहन जांच के फंसाया गया है।”

संजय प्लेस स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेसवार्ता में डॉ. कविता ने कहा कि, “एफआईआर 25 अक्टूबर को दर्ज होते ही मेरे पति को अत्यंत जल्दबाज़ी में प्रयागराज से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जबकि अभी तक किसी भी पहलू पर उचित जांच नहीं हुई। परिवार सहित हम सब मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो मैं मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय की गुहार लगाऊंगी।” डॉ. कविता ने कहा कि “यह हमारे परिवार की प्रतिष्ठा का प्रश्न है। मेरे पति को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रचा गया है। न्यायपालिका और समाज से अनुरोध है कि निष्पक्ष जांच हो। हमें भी अपनी बात रखने का अवसर मिले।” उन्होंने कहा कि “परिवार वर्तमान में भय और तनाव में है तथा समाज से समर्थन और निष्पक्षता की अपेक्षा करता है।”

व्हाट्सएप चैट में आरोपों को साजिश बताया
प्रेसवार्ता में डॉ. कविता ने कथित व्हाट्सएप चैट का हवाला देते हुए कहा कि “शोधार्थी छात्रा कुछ अन्य लोगों के साथ लगातार संपर्क में थी और चैट में एक युवक द्वारा “प्रोफेसर को फंसाने” की बात भी सामने आती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि “छात्रा ने कई बार पैसों की मांग की तथा मेल-मिलाप की बातें भी की थीं।” उन्होंने कहा कि “वह हमारे घर आती जाती थी, परिवार जैसा व्यवहार था। खजुराहो, बरसाना और बागेश्वर धाम की यात्राएं भी मेरी जानकारी और सहमति से हुईं। मेरे पति को वर्षों से चर्म रोग है और छात्रा इलाज की बात कहकर ले जाती थी।”

प्रतिष्ठित शिक्षक, श्रेष्ठ शोधकर्ता चरित्रहनन का प्रयास
डॉ. कविता ने बताया कि “प्रो. जैसवार प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हैं और कुछ माह पूर्व राज्यपाल द्वारा ‘बेस्ट टीचर इन रिसर्च’ सम्मान से सम्मानित हुए हैं। “वे नैनो टेक्नोलॉजी पर शोध कर रहे थे और विभागाध्यक्ष बनने की दौड़ में अग्रणी थे। ऐसे उत्कृष्ट शोधकर्ता और परिवार वाले व्यक्ति पर इस प्रकार के आरोप निराधार और असंगत हैं।” उन्होंने कहा कि छात्रा ने स्वयं पहले प्रोफेसर की प्रशंसा में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे।”
ब्लैकमेलिंग की बात शादी और नौकरी का आरोप तर्कहीन
डॉ. कविता ने कहा कि “पति पर नौकरी और शादी के झांसे का आरोप लगाया गया है, जबकि को-गाइड के पास किसी भी तरह की नौकरी देने का अधिकार नहीं होता। विवाहित व्यक्ति से शादी के झांसे में आने की बात भी समझ से परे है, क्योंकि छात्रा घर आती-जाती थी, परिवार से मिलती थी।” उन्होंने सवाल किया कि “यदि कथित शारीरिक शोषण पिछले दो वर्षों से चल रहा था, तो इतने लंबे समय तक किसी मंच पर शिकायत क्यों नहीं की गई?”
कॉल डिटेल जांच की मांग
प्रोफ़ेसर की पत्नी ने कॉल डिटेल निकलवाने की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके। आरोपी प्रोफ़ेसर की पत्नी ने जो भी तथ्य और बातें मीडिया के समक्ष रखीं, वो उनकी अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाती है। दूसरी तरफ प्रोफ़ेसर पर लगे संगीन आरोप, एफआईआर, गिरफ़्तारी कुछ और ही बयां करती है। आखिर सच क्या है, ये तो स्वयं प्रोफ़ेसर, पीड़ित छात्रा ही जानती है। पुलिस अपना काम करती है और कानून अपना। जहाँ साक्ष्य होंगे फैसला उस तरफ होगा। लेकिन मामले में निष्पक्ष फैसला समाज को बल प्रदान करेगा और गलत फैसला पीड़ित को और ज्यादा दर्द देगा और कानून से भरोसा भी तोड़ेगा। इसलिए न्याय होना चाहिए, अन्याय नहीं। पीड़ित का दर्द अपने आप में असहनीय है।




